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अग्न्याशय कैंसर (Pancreatic Cancer) तेजी से बढ़ते गंभीर कैंसरों में से एक है। यह कैंसर अग्न्याशय की कोशिकाओं में तब होता है। जब वह अनियंत्रित रूप से बढ़ने के साथ एक ट्यूमर बनाती हैं। कई बार शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य पेट संबंधी परेशानियों जैसे दिखते हैं। इसलिए रोग अक्सर देर से पहचाना जाता है। अगर यदि समय रहते जांच कर ली जाए, तो इलाज की सफलता दर बढ़ जाती है। नोएडा में अब एडवांस्ड ऑन्कोलॉजी अस्पताल (Oncology Hospital in Noida), उच्च स्तरीय इमेजिंग सुविधाएं और अनुभवी ऑन्कोलॉजिस्ट उपलब्ध हैं। अग्न्याशय कैंसर का इलाज नोएडा में उपलब्ध है। जहां अंतरराष्ट्रीय गाइडलाइन के अनुसार इसका इलाज किया जा रहा है।
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अग्न्याशय एक महत्वपूर्ण ग्रंथि है जो पेट के पीछे स्थित होती है। पाचन के लिए आवश्यक एंजाइम तथा ब्लड शुगर को नियंत्रित करने वाला हार्मोन इंसुलिन बनाती है। जब अग्न्याशय की कोशिकाएं असामान्य रूप से तेजी से बढ़ती हैं और उन पर नियंत्रण नहीं रहता, तो वहां ट्यूमर बनता है। जिसे अग्न्याशय कैंसर कहते हैं। यह बीमारी शुरू में बिना लक्षण के बढ़ती है। इसलिए अक्सर देर से पता चलती है। अग्न्याशय कैंसर (Pancreatic cancer) दो मुख्य प्रकार का होता है। पहला एक्सोक्राइन कैंसर, जो सबसे अधिक पाया जाता है और इसमें प्रमुख रूप से अग्नाशय एडेनोकार्सिनोमा शामिल है। दूसरा एंडोक्राइन या न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर, जो कम पाए जाते हैं। आमतौर पर अपेक्षाकृत कम खतरनाक माने जाते हैं।
ऑन्कोलॉजी गाइडलाइन के अनुसार यह कैंसर कई जोखिम कारणों से जुड़ा होता है:
धूम्रपान और तंबाकूः तंबाकू सेवन अग्न्याशय कैंसर का सबसे बड़ा कारण है।
आनुवंशिक / फैमिली हिस्ट्रीः यदि परिवार में दो या अधिक लोगों को यह कैंसर हुआ है तो जोखिम अधिक होता है।
डायबिटीज (खासकर नई शुरुआत वाली): अचानक बढ़ी शुगर भी शुरुआती संकेत हो सकती है।
मोटापा और हाई फैट डाइट: लंबे समय तक मोटापा अग्न्याशय का कैंसर के जोखिम को बढ़ाता है।
क्रॉनिक पैंक्रियाटाइटिसः लंबे समय तक अग्न्याशय में सूजन रहता है।
उच्च आयुः 60 वर्ष के बाद इसका खतरा बढ़ जाता है।
शुरुआती स्टेज में लक्षण बहुत सामान्य या अनदेखे होते हैं। लेकिन कुछ संकेत महत्वपूर्ण हैं:
लगातार पेट या पीठ में दर्द
भूख कम लगना और तेजी से वजन घटना
पीलिया (जॉन्डिस) यानी त्वचा व आंखें पीली पड़ना
हल्का (क्ले-कलर) मल और गहरा पेशाब
पाचन समस्या, एसिडिटी, गैस, अपच
मतली या उल्टी
ब्लड शुगर का अचानक बढ़ना (नई डायबिटीज)
थकान और कमजोरी
अग्न्याशय कैंसर की पुष्टि और स्टेजिंग के लिए निम्न जांच की जाती हैं:
ब्लड टेस्टः एलएफटी, सीबीसी, सीए 19-9 : CA 19-9 ट्यूमर मार्कर कई मरीजों में बढ़ा मिलता है।
अल्ट्रासाउंड / एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड: ट्यूमर को तकनीकी रूप से सबसे सटीक दर्शाता है।
सीटी स्कैन (कंट्रास्ट सीटी – अग्नाशय प्रोटोकॉल) ट्यूमर का आकार, लोकेशन और फैलाव पता चलता है।
MRI/MRCP: बाइल डक्ट और पैंक्रियास की हाई-रिजोल्यूशन इमेजिंग के लिए होता है।
पीईटी-सीटीः कैंसर शरीर के अन्य भागों में फैला है या नहीं, यह बताता है।
बायोप्सी (FNAC/EUS): कैंसर के प्रकार की अंतिम पुष्टि के लिए होता है।
सर्जरी अग्न्याशय कैंसर के शुरुआती स्टेज में सबसे प्रभावी उपचार माना जाता है, क्योंकि इस समय ट्यूमर सीमित होता है और शरीर के अन्य हिस्सों में फैला नहीं होता। अग्न्याशय के सिर में ट्यूमर होने पर Whipple Surgery की जाती है, जिसमें अग्न्याशय का प्रभावित हिस्सा, डुओडेनम, बाइल डक्ट और गॉल ब्लैडर (Gallbladder) को हटाया जाता है ताकि कैंसर पूरी तरह समाप्त किया जा सके। वहीं, जब ट्यूमर अग्न्याशय की बॉडी या टेल में हो, तो Distal Pancreatectomy प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिसमें अक्सर स्प्लीन भी साथ में निकालना पड़ता है। इन सर्जरी का मुख्य उद्देश्य ट्यूमर को पूरी तरह हटाना और कैंसर के फैलने की संभावना को कम करना होता है। शुरुआती चरण में उपचार की सफलता दर अधिक होती है और सर्जरी के बाद मरीज के लंबे समय तक जीवित रहने की संभावना भी बढ़ जाती है।
कीमोथेरेपी अग्न्याशय कैंसर के इलाज का एक प्रमुख स्तंभ है। विशेष रूप से मध्यम और अग्रिम स्टेज के मरीजों में। इसे विभिन्न परिस्थितियों में दिया जाता है। सर्जरी से पहले (Neoadjuvant Therapy) ताकि ट्यूमर को छोटा किया जा सके। सर्जरी के बाद (Adjuvant Therapy) बची हुई कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए और मेटास्टेटिक यानी फैल चुके कैंसर में लक्षणों को कम करने के उद्देश्य से। आमतौर पर कीमोथेरेपी में Gemcitabine, FOLFIRINOX (जो बहुत प्रभावी लेकिन थोड़ी स्ट्रॉन्ग होती है), Cisplatin और 5-FU (5-Fluorouracil) जैसी दवाओं का उपयोग किया जाता है। इसके साथ सपोर्टिव थेरेपी भी दी जाती है, जिसमें उल्टी रोकने की दवाएं, इम्यून बूस्टर, दर्द निवारण और मरीज के ब्लड वाइटल्स तथा किडनी और लिवर फंक्शन की लगातार मॉनिटरिंग शामिल होती है, ताकि उपचार सुरक्षित और प्रभावी तरीके से किया जा सके।
टार्गेटेड थेरेपी (Targeted therapy) अग्न्याशय कैंसर का एक आधुनिक उपचार है, जो विशेष रूप से उन कैंसर कोशिकाओं के जननिक (Genetic) बदलावों को निशाना बनाती है, जो ट्यूमर की वृद्धि में मदद करते हैं। यह उपचार कैंसर कोशिकाओं में पाए जाने वाले प्रोटीन या म्यूटेशन को ब्लॉक करता है, जबकि सामान्य कोशिकाओं को कम नुकसान पहुंचाता है और ट्यूमर की वृद्धि को धीमा करता है। कुछ मामलों में PARP Inhibitors का उपयोग किया जाता है, जो BRCA1/BRCA2 जीन म्यूटेशन वाले मरीजों में बेहद प्रभावी साबित होते हैं। इसके अलावा, EGFR या VEGF Targeted Drugs भी दी जाती हैं, जो खून की नलियों की वृद्धि को रोककर ट्यूमर को कमजोर करती हैं और कैंसर की प्रगति को नियंत्रित करती हैं।
इम्यूनोथेरेपी अग्न्याशय कैंसर के इलाज में एक आधुनिक तरीका है। जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय और मजबूत बनाती है। जिससे वह कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर नष्ट कर सके। इसका मुख्य लाभ यह है कि यह सामान्य शरीर पर कम दुष्प्रभाव डालती है, लंबे समय तक परिणाम देती है और कुछ मरीजों में ट्यूमर की वृद्धि पूरी तरह रुक जाती है। इम्यूनोथेरेपी विशेष रूप से उन मरीजों में उपयोग होती है जिनमें Pancreatic Neuroendocrine Tumor (PNET) पाया गया हो या जब पारंपरिक कीमोथेरेपी प्रभावी न हो।
रेडिएशन थेरेपी में उच्च-ऊर्जा किरणों (High-energy X-ray या Proton therapy) का उपयोग करके कैंसर कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है। इसे विभिन्न परिस्थितियों में अपनाया जाता है, जैसे सर्जरी से पहले ट्यूमर को छोटा करने के लिए, सर्जरी के बाद बची हुई कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने के लिए, या जब सर्जरी संभव न हो तब दर्द और ब्लॉकेज कम करने के उद्देश्य से। रेडिएशन थेरेपी से ट्यूमर की वृद्धि धीमी होती है और मरीज को पेट दर्द, पीलिया और अन्य संबंधित लक्षणों में राहत मिलती है, जिससे जीवन की गुणवत्ता बेहतर होती है।
पेलिएटिव केयर अग्न्याशय कैंसर के अंतिम चरण में मरीज की जीवन-गुणवत्ता सुधारने के लिए दिया जाने वाला उपचार है। इसमें कई विकल्प शामिल होते हैं। जैसे Bile Duct Stent जो पीलिया और ब्लॉकेज को कम करने में मदद करता है; Pancreatic Enzyme Supplements, जो भोजन के पाचन को बेहतर बनाते हैं। Pain Management, जिसमें मॉर्फिन या अन्य पेन मैनेजमेंट तकनीकों का उपयोग करके दर्द कम किया जाता है; और Nutrition Support, जो मरीज की ताकत और ऊर्जा बनाए रखने में सहायक होता है। पेलिएटिव केयर का मुख्य उद्देश्य दर्द को कम करना, पाचन को सुधारना, जीवन की गुणवत्ता बढ़ाना और मरीज को अधिकतम आराम और राहत प्रदान करना होता है।
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अचानक वजन घटना
नई डायबिटीज का प्रकट होना
लगातार पेट/पीठ दर्द
पीलिया
धूम्रपान करने वाले
फैमिली हिस्ट्री वाले
क्रॉनिक पैंक्रियाटाइटिस वाले
मोटापे और डायबिटीज़ वाले
धूम्रपान और तंबाकू छोड़ें
डायबिटीज नियंत्रण में रखें
कम फैट वाला संतुलित भोजन लें
वजन नियंत्रित रखें
शराब से दूरी
लंबे समय तक पेट दर्द या गैस को नजरअंदाज न करें
हर साल हेल्थ स्क्रीनिंग करवाएं
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अग्न्याशय कैंसर एक गंभीर बीमारी है। लेकिन शुरुआती पहचान और सही समय पर उपचार से मरीज की जीवन प्रत्याशा में सुधार किया जा सकता है। नोएडा में आधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाएं, अनुभवी ऑन्कोलॉजिस्ट और एडवांस्ड कैंसर थेरेपी उपलब्ध हैं, जिससे इलाज और भी आसान व बेहतर हुआ है। इसलिए इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए।
उत्तर: हां, यदि ट्यूमर छोटा हो और सर्जरी possible हो तो शुरुआती stage में इलाज की सफलता अधिक होती है।
उत्तर: लंबे समय से डायबिटीज होना और अचानक नई डायबिटीज शुरू होना, दोनों ही risk factors माने जाते हैं।
उत्तर: सीटी स्कैन (पैंक्रियाटिक प्रोटोकॉल), ईयूएस और सीए 19-9 टेस्ट सबसे मुख्य diagnostic tests हैं।
उत्तर: हां, नोएडा के प्रमुख ऑन्कोलॉजी सेंटर्स में सर्जरी, कीमो, रेडिएशन, टार्गेटेड और इम्यूनोथेरेपी सभी treatment options मौजूद हैं।
उत्तर: धूम्रपान छोड़ना, वजन नियंत्रित रखना, सही खान-पान और नियमित जांच से इसका risk काफी कम किया जा सकता है।