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हेमेटोमा एक सामान्य लेकिन कई बार गंभीर स्थिति होती है। जिसे अक्सर लोग साधारण चोट समझकर नजरअंदाज करते हैं। सही समय पर पहचान और इलाज न होने पर यह जटिल रूप लेता है। अक्सर हेमेटोमा (शरीर में रक्त जमाव) चोट लगने, गिरने, दुर्घटना या सर्जरी के बाद बनता है। Best general Surgeon Hospital In Noida में उपलब्ध है। छोटे हेमेटोमा अपने आप ठीक होते हैं, लेकिन बड़े या जटिल हेमेटोमा गंभीर स्थिति बनते हैं। आइए इसे विस्तार से समझते हैं।
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हेमेटोमा (शरीर में रक्त जमाव) वह स्थिति है। जिसमें चोट या रक्त वाहिका फटने के कारण खून शरीर के ऊतकों, त्वचा या अंगों के अंदर जमा होता है। यह एक तरह का खून का जमा हुआ थक्का होता है। जो शरीर के किसी भी हिस्से में बनता है। छोटे हेमेटोमा सामान्य चोट की तरह ठीक होते हैं, लेकिन बड़े या आंतरिक हेमेटोमा गंभीर हो सकते हैं।
यह मस्तिष्क और खोपड़ी की सतह को ढकने वाले झिल्ली के नीचे खून जमने से होता है। यह सिर पर चोट लगने, गिरने या एक्सीडेंट के बाद विकसित होता है। सिरदर्द (Headache), उल्टी, भ्रम, नींद अधिक आना और कभी-कभी दौरे पड़ना शुरुआती लक्षण है। यह धीमी गति से भी विकसित हो सकता है, इसलिए बुज़ुर्गों में देर से पहचान होती है।
खोपड़ी और दुरा के बीच रक्तस्राव से होता है। अक्सर सिर पर गंभीर चोट या फ्रैक्चर के कारण विकसित होता है। बेहोशी, गंभीर सिरदर्द और आंखों की पुतली फैलना जैसे लक्षण दिखते हैं। यह आपात स्थिति होती है और त्वरित सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है।
दिमाग के ऊतक के भीतर खून का जमता है। इस कारण स्ट्रोक (Stroke), उच्च रक्तचाप, चोट या मस्तिष्क की नस फटना है। बोलने में दिक़्क़त, शरीर के एक हिस्से में कमजोरी या लकवा, दौरे इसके लक्षण है। यह जानलेवा होता है। तुरंत न्यूरोलॉजिकल इलाज चाहिए।
मांसपेशियों पर चोट, गिरने या ज़्यादा खिंचाव से खून जमा होता है। प्रभावित हिस्से में सूजन, दर्द और कठोरता महसूस होती है। अक्सर खिलाड़ियों और एक्सरसाइज करने वालों में देखा जाता है। छोटे मसल हेमेटोमा आराम और बर्फ की सिकाई से ठीक हो जाते हैं, लेकिन बड़े मामलों में दवा व ड्रेनेज जरूरी होता है।
त्वचा के नीचे खून का जमाव, जिसे आमतौर पर चोट या ब्लंट ट्रॉमा से पहचाना जाता है। यह नीले-काले निशान की तरह दिखता है। हल्के मामलों में खुद ठीक हो जाते हैं, लेकिन बड़े जमाव में दर्द और ऊतक क्षति होती है।
नाखून पर चोट या किसी भारी वस्तु के दबने से खून नाखून के नीचे फंसता है। नाखून काला या नीला पड़ जाता है और तेज दर्द होता है। छोटे नेल हेमेटोमा खुद ठीक हो जाते हैं, लेकिन बड़े मामलों में डॉक्टर को खून निकालना पड़ता है।
गिरने, टकराने या सड़क दुर्घटना जैसी घटनाओं में खून की नस फटती है। जिससे खून बाहर निकलकर जमा होता है।
ऑपरेशन, इंजेक्शन या मेडिकल प्रोसीजर के बाद रक्तस्राव होकर हेमेटोमा बनता है।
सिर पर चोट लगने से मस्तिष्क के अंदर या उसके आवरण में खून जमा होकर ब्रेन हेमेटोमा विकसित होता है।
हड्डी टूटने (Bone fractures) पर उसके आसपास की रक्त वाहिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं और खून जमता है।
वारफारिन, एस्पिरिन जैसी दवाएं लेने वाले लोगों में खून आसानी से बहता है। जमाव का खतरा बढ़ता है।
उम्र के साथ रक्त वाहिकाएं कमजोर होती हैं। जिससे मामूली चोट पर भी हेमेटोमा बनने की संभावना रहती है।
लगातार उच्च रक्तचाप से नसों पर दबाव बढ़ता है और उनके फटने से रक्तस्राव होता है।
प्रभावित जगह पर उभार या फूला हुआ हिस्सा दिखाई देता है।
लाल, नीला या काला निशान दिखना (bruise की तरह) दिखता है।
दबाने या छूने पर दर्द होता है।
प्रभावित जगह पर गर्माहट या हल्की जलन महसूस होता है।
अकड़न या हिलाने-डुलाने में कठिनाई होती है।
तेज सिरदर्द, चक्कर आना, उल्टी, बेहोशी तक होती है।
सांस लेने में कठिनाई या सीने में भारीपन महसूस होता है।
हेमेटोमा खतरनाक हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क जरूरी है।
यह दिमाग में हो
लगातार आकार बढ़ रहा हो
बहुत ज्यादा दर्द और सूजन हो
सांस लेने में दिक्कत हो (छाती में होने पर)
बार-बार हो रहा हो
शारीरिक जांच
अल्ट्रासाउंड
सीटी स्कैन
ब्लड टेस्ट
हेमेटोमा का इलाज उसकी गंभीरता, स्थान (लोकेशन) और आकार पर निर्भर करता है। छोटे हेमेटोमा सामान्य घरेलू उपायों से ठीक हो सकते हैं, जबकि बड़े या आंतरिक हेमेटोमा में मेडिकल हस्तक्षेप जरूरी होता है।
चोट लगने के बाद प्रभावित हिस्से को पूरा आराम देना बेहद जरूरी होता है। ज्यादा चलना-फिरना या उस हिस्से पर दबाव डालना हेमेटोमा को बढ़ा सकता है। खासकर मसल (मांसपेशी) हेमेटोमा में भारी काम, एक्सरसाइज या स्ट्रेचिंग से बचना चाहिए।
चोट लगने के तुरंत बाद 15–20 मिनट तक बर्फ की सिकाई करना सबसे प्रभावी उपायों में से एक माना जाता है, क्योंकि यह सूजन को कम करता है, दर्द को नियंत्रित करता है और रक्तस्राव को फैलने से रोकने में मदद करता है। दिन में 3–4 बार बर्फ की सिकाई की जा सकती है, लेकिन ध्यान रखें कि बर्फ को सीधे त्वचा पर न लगाएं, बल्कि उसे कपड़े में लपेटकर ही इस्तेमाल करें ताकि त्वचा को नुकसान न पहुंचे।
इलास्टिक बैंडेज या पट्टी से हल्का दबाव देने से प्रभावित हिस्से में खून का फैलाव कम होता है। सूजन नियंत्रित रहती है। दर्द में राहत मिलती है।
चोट वाले हिस्से को दिल (हृदय) के स्तर से ऊपर रखना चाहिए, जैसे पैर में चोट हो तो तकिया लगाकर ऊंचा रखें। इससे खून का जमाव कम होता है। सूजन तेजी से घटती है।
जब हेमेटोमा बड़ा हो, दर्द बढ़ता जाए या खुद ठीक न हो, तब डॉक्टर द्वारा इलाज जरूरी होता है।
डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार दवाएं देते हैं, जैसे पेरासिटामोल (हल्के दर्द के लिए) जरूरत पड़ने पर अन्य दर्द निवारक लेनी होती है। मगर बिना डॉक्टर की सलाह के ब्लड थिनिंग दवाएं (जैसे एस्पिरिन) न लें। क्योंकि यह रक्तस्राव बढ़ा सकती हैं।
अगर हेमेटोमा में संक्रमण का खतरा हो या त्वचा लाल, गर्म और दर्दनाक हो जाए, तो डॉक्टर एंटीबायोटिक्स दे सकते हैं। इससे बैक्टीरिया के फैलाव को रोका जाता है। फोड़ा या पस बनने से बचाव होता है
जब हेमेटोमा बहुत बड़ा हो या उसमें खून ज्यादा जमा हो जाए, तो डॉक्टर सुई (Needle) या छोटे ऑपरेशन के जरिए जमा खून निकालते हैं। इससे दर्द तुरंत कम होता है। सूजन घटती है।आसपास के ऊतकों पर दबाव कम होता है। यह प्रक्रिया खासतौर पर मसल और सबक्यूटेनियस हेमेटोमा में उपयोगी होती है।
गंभीर मामलों में सर्जरी जरूरी हो जाती है, जैसे ब्रेन हेमेटोमा (दिमाग में खून जमा होना). लगातार बढ़ता हुआ हेमेटोमा, अंगों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। Best General Surgeons in Noida में उपलब्ध है। सर्जरी के दौरान जमा खून हटाया जाता है और रक्तस्राव के स्रोत को नियंत्रित किया जाता है। यह जीवनरक्षक प्रक्रिया होती है।
तेज और बढ़ता हुआ दर्द
सूजन लगातार बढ़ना
सिर में चोट के बाद उल्टी या बेहोशी
सांस लेने में दिक्कत
प्रभावित हिस्से का सुन्न होना या काम न करना
हेलमेट और सुरक्षा उपकरण पहनें
ब्लड थिनिंग दवाएं डॉक्टर की सलाह से लें
ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखें
संतुलित आहार लें
चोट लगने पर तुरंत इलाज करें
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हेमेटोमा एक सामान्य समस्या होते हुए भी कई बार गंभीर रूप ले सकता है। छोटे मामलों में यह अपने आप ठीक हो जाता है, लेकिन बड़े या आंतरिक हेमेटोमा जानलेवा हो सकते हैं। इसलिए किसी भी असामान्य सूजन, दर्द या सिर की चोट को नजरअंदाज न करें। छोटे हेमेटोमा का इलाज आसानी से हो जाता है। लेकिन अगर स्थिति गंभीर हो, तो दवाएं, ड्रेनेज या सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।
उत्तर: नहीं। ब्लड क्लॉट नस के अंदर बनता है, जबकि हेमेटोमा शरीर के ऊतकों में खून जमा होने से बनता है।
उत्तर: छोटे हेमेटोमा खुद ठीक हो जाते हैं, लेकिन बड़े मामलों में इलाज जरूरी है।
उत्तर: हां, खासकर अगर यह दिमाग या आंतरिक अंगों में हो।
उत्तर: छोटे हेमेटोमा 1–2 हफ्तों में ठीक हो जाते हैं, लेकिन बड़े मामलों में समय अधिक लग सकता है।
उत्तर: हल्के मामलों में हां, लेकिन लगातार दर्द या सूजन हो तो डॉक्टर से संपर्क करें।