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पुरुष बांझपन: लक्षण, जांच और नोएडा में उन्नत इलाज

पुरुष बांझपन (Male Infertility) वह स्थिति है। जब नियमित और असुरक्षित यौन संबंध के बावजूद 12 महीनों तक गर्भधारण नहीं होता। समस्या का कारण पुरुष पक्ष में पाया जाता है। आधुनिक चिकित्सा के अनुसार लगभग 40–50% मामलों में बांझपन का कारण पुरुष कारक होते हैं। समय पर सही जांच और विशेषज्ञ उपचार से अधिकांश मामलों में सुधार संभव है। नोएडा में सर्वश्रेष्ठ यूरोलॉजी अस्पताल उपलब्ध है नोएडा जैसे विकसित शहर में अनुभवी यूरोलॉजिस्ट, एंड्रोलॉजिस्ट और उन्नत लैब सुविधाओं से युक्त अस्पतालों में पुरुष बांझपन का आधुनिक इलाज उपलब्ध है।


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पुरुष बांझपन क्या होता है? (What is male infertility)

जब पुरुष के शुक्राणुओं की संख्या, गुणवत्ता या उनकी गतिशीलता सामान्य से कम हो जाती है और इसके कारण गर्भधारण में कठिनाई आती है, तो इस स्थिति को पुरुष बांझपन कहा जाता है। सामान्यतः एक स्वस्थ पुरुष में कम से कम 1.5 मिलीलीटर या उससे अधिक वीर्य की मात्रा, पर्याप्त संख्या में स्वस्थ शुक्राणु, तथा उनकी अच्छी गतिशीलता और सही संरचना होना आवश्यक माना जाता है। इनमें से किसी भी स्तर पर कमी आने से प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है।

 

  (यह भी पढ़ें: जाने वीर्य की कमी के लक्षण और इलाज नोएडा में)
 

पुरुष बांझपन के लक्षण क्या हैं? (What are the symptoms of male infertility)

अक्सर पुरुष बांझपन के स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन कुछ संकेत होते हैं:


गर्भधारण में असफलता-
एक वर्ष तक प्रयास के बाद भी गर्भधारण न होना।


वीर्य की मात्रा में कमी-
स्खलन के समय वीर्य कम निकलना।


यौन समस्याएं

 

  • इरेक्शन बनाए रखने में कठिनाई

  • यौन इच्छा में कमी

  • शीघ्रपतन


अंडकोष में दर्द या सूजन-


वेरिकोसील या अन्य संरचनात्मक समस्या का संकेत होता है।


हार्मोनल लक्षण-

 

  • शरीर पर बाल कम होना

  • मांसपेशियों में कमजोरी

  • स्तन वृद्धि (गाइनेकोमास्टिया)

 

पुरुष बांझपन क्यों होता है? (मुख्य कारण) Why does male infertility occur (Main causes)


शुक्राणु संबंधित समस्याएं-

जब पुरुष में शुक्राणुओं की संख्या सामान्य से कम हो जाती है। जिसे ओलिगोस्पर्मिया कहा जाता है या वीर्य में शुक्राणु पूरी तरह अनुपस्थित होते हैंय़ जिसे एजूस्पर्मिया कहा जाता है। अथवा शुक्राणुओं की गतिशीलता कम हो जाती है या उनकी संरचना में दोष पाया जाता है, तो ये सभी स्थितियां पुरुष की प्रजनन क्षमता को प्रभावित करती हैं।


हार्मोनल असंतुलन-

टेस्टोस्टेरोन, एफएसएच, एलएच  में कमी से शुक्राणु निर्माण प्रभावित होता है।


वेरिकोसील-

अंडकोष की नसों में सूजन, जिससे तापमान बढ़ता है और शुक्राणु उत्पादन कम होता है।


संक्रमण-

प्रोस्टेट में संक्रमण, यौन संचारित रोग तथा मूत्र मार्ग संक्रमण जैसी समस्याएँ पुरुष प्रजनन स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं और समय पर उपचार न होने पर ये शुक्राणुओं की गुणवत्ता तथा संख्या पर भी नकारात्मक असर डाल सकती हैं।

 

जीवनशैली कारण

धूम्रपान, शराब का सेवन, नशीले पदार्थों का उपयोग, अत्यधिक तनाव, मोटापा और शारीरिक निष्क्रियता जैसी जीवनशैली से जुड़ी आदतें पुरुष प्रजनन स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं और समय के साथ शुक्राणुओं की संख्या, गुणवत्ता तथा उनकी गतिशीलता को प्रभावित कर सकती हैं।


आनुवंशिक कारण
कुछ मामलों में क्रोमोसोम संबंधी असामान्यताएं भी कारण हो सकती हैं।


सर्जरी या चोट
पूर्व में हुई सर्जरी, चोट या नसों में अवरोध से कई बार समस्या होती है।


पुरुष बांझपन की जांच कैसे होती है ? (How is male infertility diagnosed)

 

वीर्य विश्लेषण-

यह सबसे महत्वपूर्ण जांच होती है, जिसमें वीर्य की मात्रा, शुक्राणुओं की कुल संख्या, उनकी गतिशीलता तथा उनके आकार (मॉर्फोलॉजी) का विस्तार से परीक्षण किया जाता है, ताकि प्रजनन क्षमता का सही आकलन किया जा सके।


हार्मोन जांच-

इस जांच में टेस्टोस्टेरोन, एफएसएच, एलएच और प्रोलैक्टिन जैसे महत्वपूर्ण हार्मोनों के स्तर की जांच की जाती है, क्योंकि इन हार्मोनों का संतुलन पुरुष प्रजनन क्षमता और शुक्राणु निर्माण प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाता है।


अल्ट्रासाउंड

अंडकोष और प्रोस्टेट की जांच के लिए होता है।


जेनेटिक टेस्ट

गंभीर मामलों में क्रोमोसोम जांच की जाती है।


विशेष जांच

कुछ मामलों में एमआरआई या बायोप्सी की जरूरत पड़ सकती है।

 

पुरुष बांझपन का इलाज क्या है? (What is the treatment for male infertility)

पुरुष बांझपन का इलाज पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि समस्या किस कारण से हो रही है। सही कारण जानने के लिए पहले विस्तृत जांच की जाती है, उसके बाद उसी आधार पर उपचार योजना बनाई जाती है। नोएडा में सर्वश्रेष्ठ यूरोलॉजिस्ट उपलब्ध है। कई मामलों में दवाओं और जीवनशैली सुधार से लाभ मिल जाता है, जबकि कुछ स्थितियों में सर्जरी या उन्नत प्रजनन तकनीकों की आवश्यकता पड़ती है।


दवाइयों से इलाज-
यदि समस्या हार्मोनल असंतुलन, संक्रमण या पोषण की कमी से जुड़ी हो, तो दवाओं के माध्यम से उपचार किया जाता है।


हार्मोन थेरेपी:
यदि टेस्टोस्टेरोन, एफएसएच या एलएच जैसे हार्मोनों का स्तर असंतुलित हो, तो डॉक्टर हार्मोन थेरेपी की सलाह दे सकते हैं। इससे शुक्राणु निर्माण प्रक्रिया में सुधार होता है।

 

एंटीबायोटिक्स (संक्रमण की स्थिति में):
प्रोस्टेट या मूत्र मार्ग संक्रमण, या यौन संचारित रोग होने पर एंटीबायोटिक्स दी जाती हैं। जिससे संक्रमण खत्म होकर शुक्राणुओं की गुणवत्ता बेहतर हो सके।

 

एंटीऑक्सीडेंट सप्लीमेंट:
विटामिन सी, विटामिन ई, जिंक, सेलेनियम और को-एंजाइम क्यू 10 जैसे एंटीऑक्सीडेंट सप्लीमेंट ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करते हैं और शुक्राणुओं की गुणवत्ता व गतिशीलता में सुधार लाते हैं।


सर्जरी
कुछ मामलों में शारीरिक अवरोध या नसों की समस्या के कारण शुक्राणु बाहर नहीं आ पाते हैं। ऐसी स्थिति में सर्जरी की आवश्यकता होती है।

 

वेरिकोसील सर्जरी:
वेरिकोसील (अंडकोष की नसों का सूजना) पुरुष बांझपन का एक सामान्य कारण है। सर्जरी द्वारा इन नसों को ठीक कर रक्त प्रवाह सामान्य किया जाता है। जिससे शुक्राणु उत्पादन में सुधार होता है।

 

अवरोध हटाने की प्रक्रिया:
यदि शुक्राणु मार्ग में किसी प्रकार का अवरोध है, तो सर्जरी के माध्यम से उसे हटाया जाता है। जिससे शुक्राणु सामान्य रूप से बाहर आ सकें।

 

सहायक प्रजनन तकनीक (एआरटी)
जब सामान्य उपचार से गर्भधारण संभव नहीं हो पाता, तो आधुनिक प्रजनन तकनीकों का सहारा लिया जाता है।


आईवीएफ (इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन):
इस प्रक्रिया में महिला के अंडाणु और पुरुष के शुक्राणु को शरीर के बाहर लैब में मिलाया जाता है। तैयार भ्रूण को गर्भाशय में स्थापित किया जाता है।


आईसीएसआई (इंट्रा-साइटोप्लाज्मिक स्पर्म इंजेक्शन):

इस तकनीक में एक स्वस्थ शुक्राणु को सीधे अंडाणु के भीतर इंजेक्ट किया जाता है। यह तकनीक खासकर तब उपयोगी होती है जब शुक्राणु संख्या या गतिशीलता बहुत कम हो। इन उन्नत तकनीकों से गर्भधारण की संभावना काफी बढ़ जाती है और कई दंपतियों को सफल परिणाम मिलते हैं।


जीवनशैली में सुधार-

कई बार पुरुष बांझपन का कारण अस्वस्थ जीवनशैली होती है। ऐसे में दवाओं के साथ-साथ जीवनशैली में सुधार अत्यंत आवश्यक है।

 

संतुलित आहार: 
प्रोटीन, हरी सब्जियां, फल, सूखे मेवे और आवश्यक विटामिन-मिनरल से भरपूर भोजन लें।

 

नियमित व्यायाम: 
प्रतिदिन 30–40 मिनट हल्का व्यायाम या योग करने से हार्मोन संतुलन बेहतर रहता है।

 

धूम्रपान व शराब से परहेज: 
यह आदतें शुक्राणुओं की गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं।

 

तनाव प्रबंधन: 
ध्यान, योग और पर्याप्त विश्राम से मानसिक तनाव कम किया जा सकता है।

 

पर्याप्त नींद: 
रोज 7–8 घंटे की नींद हार्मोन संतुलन और प्रजनन स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।

 

जीवनशैली में सुधार क्यों जरूरी है? (Why are lifestyle changes important)

अच्छी जीवनशैली से:

 

  • हार्मोन संतुलन सुधरता है

  • शुक्राणु गुणवत्ता बेहतर होती है

  • ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम होता है

  • मानसिक स्वास्थ्य मजबूत होता है

हरी सब्जियां, फल, ड्राई फ्रूट्स, जिंक और विटामिन सी व ई से भरपूर आहार फायदेमंद होते हैं।

 

कब डॉक्टर से संपर्क करें? (When should you consult a doctor)

 

  • 12 महीने से गर्भधारण नहीं हो रहा हो

  • वीर्य में लगातार कमी

  • इरेक्शन या यौन इच्छा में समस्या

  • अंडकोष में दर्द या सूजन

  • मूत्र या वीर्य में खून


नोएडा में विशेषज्ञ से परामर्श हेतु कॉल करें: +91 9667064100

 

निष्कर्ष (Conclusion)

पुरुष बांझपन एक सामान्य लेकिन संवेदनशील स्वास्थ्य समस्या है। सही समय पर जांच, अनुभवी विशेषज्ञ की सलाह और उचित उपचार से अधिकांश मामलों में सुधार संभव है। आधुनिक चिकित्सा तकनीक और सहायक प्रजनन प्रक्रियाएं उन दंपतियों के लिए उम्मीद की किरण हैं। जिन्हें लंबे समय से संतान प्राप्ति में कठिनाई हो रही है। जीवनशैली में सुधार और नियमित फॉलोअप उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

FAQs

प्रश्न 1: क्या पुरुष बांझपन पूरी तरह ठीक हो सकता है?

उत्तर: कई मामलों में कारण के अनुसार दवा, सर्जरी या जीवनशैली सुधार से सुधार संभव है।

प्रश्न 2: क्या कम शुक्राणु संख्या होने पर पिता बनना संभव है?

उत्तर: हां, आधुनिक तकनीक जैसे आईवीएफ और आईसीएसआई से गर्भधारण संभव है।

प्रश्न 3: क्या तनाव का असर पड़ता है?

उत्तर: हां, अत्यधिक तनाव हार्मोनल असंतुलन पैदा करता है और शुक्राणु गुणवत्ता प्रभावित होती है।

प्रश्न 4: इलाज में कितना समय लगता है?

उत्तर: यह कारण पर निर्भर करता है। सामान्यतः 3–6 महीने में सुधार देखा जाता है।

प्रश्न 5: क्या जीवनशैली बदलने से फर्क पड़ता है?

उत्तर: बिल्कुल, सही आहार, व्यायाम और नशे से दूरी से शुक्राणु गुणवत्ता में सुधार आता है।

Written and verified by:
Dr. Bhanwar Lal Barkesiya

Dr. Bhanwar Lal Barkesiya

MBBS, MS, FMAS & MCH (GOLD MEDALIST) | Exp: 15 Yr
Urology

Dr. Bhanwar Lal Barkesiya is an MCh Gold Medalist Urologist with 15+ years of experience in laser kidney stone surgery, TURP, PCNL, robotic urology, and complex urological care at Felix Hospitals, Noida.