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सर्दियों का मौसम जहां एक ओर ठंडक और राहत लेकर आता है। वहीं दूसरी ओर यह दिल के मरीजों के लिए गंभीर खतरे भी पैदा करता है। डॉक्टरों के अनुसार, ठंड के मौसम में हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अन्य हृदय संबंधी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ते हैं। खासकर बुजुर्ग, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और पहले से हार्ट पेशेंट्स को इस मौसम में अतिरिक्त सतर्कता की जरूरत होती है। नोएडा में सर्वश्रेष्ठ कार्डियोलॉजी अस्पताल और अनुभवी डॉक्टर उपलब्ध हैं। जहां समय पर इलाज से जान बचाई जा सकती है।
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ठंड के मौसम में शरीर खुद को गर्म रखने के लिए रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ लेता है। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है। दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इस प्रक्रिया के कारण हृदय की धमनियों में ब्लॉकेज का खतरा बढ़ जाता है। हार्ट अटैक (Heart attack) की आशंका कई गुना होती है। इसलिए सावधानी जरूरी होती है।
ठंड में रक्त वाहिकाएं संकरी हो जाती हैं, जिससे दिल तक खून और ऑक्सीजन की सप्लाई कम हो जाती है। यह हार्ट अटैक का मुख्य कारण है।
सर्दियों में हाई ब्लड प्रेशर आम समस्या है। बढ़ा हुआ प्रेशर सीधे हार्ट पर दबाव डालता है, जिससे दिल का दौरा पड़ता है।
ठंड में प्यास कम लगती है और लोग पानी कम पीते हैं। इससे खून गाढ़ा होता है और थक्के बनने का खतरा बढ़ जाता है।
सुबह 5 से 9 बजे के बीच हार्ट अटैक का खतरा सबसे ज्यादा होता है। क्योंकि इस समय ठंड अधिक होती है। ब्लड प्रेशर भी बढ़ा रहता है।
सर्दियों में लोग कम चलते-फिरते हैं। तला-भुना भोजन ज्यादा करते हैं, जिससे कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
डॉक्टरों के अनुसार, सर्दियों में हार्ट अटैक कई बार साइलेंट भी हो सकता है। इसलिए इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें:
सीने में दर्द, दबाव या जलन
सांस फूलना
अचानक ठंडा पसीना आना
अत्यधिक थकान
चक्कर या घबराहट
बाएं हाथ, गर्दन या जबड़े में दर्द
ठंड से बचाव सबसे पहली जरूरत है। सिर, छाती और हाथ-पैर अच्छी तरह ढककर रखें।
बहुत ठंड में सुबह की वॉक या भारी काम से बचें। धूप निकलने के बाद टहलना ज्यादा सुरक्षित है।
तला-भुना, घी-तेल और अधिक नमक से दूरी बनाएं। फल, सब्जियां और ओमेगा-3 युक्त आहार लें।
ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच बेहद जरूरी है।
डॉक्टर द्वारा बताई गई हार्ट, बीपी और शुगर की दवाएं बिल्कुल न छोड़ें।
डॉक्टरों के अनुसार, सर्दियों में धूम्रपान हार्ट अटैक का सबसे बड़ा कारण बन सकता है।
60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग
हाई ब्लड प्रेशर के मरीज
डायबिटीज रोगी
कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ लोग
धूम्रपान करने वाले
पहले हार्ट अटैक झेल चुके मरीज
सर्दियों का मौसम, जहां ठंड और कोहरे के कारण शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। वहीं यह हार्ट अटैक के लिए सबसे खतरनाक समय भी माना जाता है। ठंडी हवाएं, शरीर में रक्त का सघन होना और धमनियों की संकुचित अवस्था सर्दियों में दिल पर दबाव बढ़ाती है। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति को हार्ट अटैक होता है, तो समय पर उपचार सबसे अहम होता है। हार्ट अटैक ट्रीटमेंट इन नोएडा (Heart attack treatment in Noida), कार्डियोलॉजिस्ट इन नोएडा में उपलब्ध है। हार्ट अटैक में पहली तीन से चार घंटे को “गोल्डन आवर” कहा जाता है। इस दौरान इलाज नहीं मिलने पर हृदय की मांसपेशियों को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है।
हार्ट अटैक की शुरुआती स्थिति में मरीज को दवाओं के माध्यम से प्राथमिक इलाज दिया जाता है। इसमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
ये दवाइयां रक्त को पतला करती हैं और खून के थक्के बनने की प्रक्रिया को रोकती हैं। हार्ट अटैक के दौरान खून के थक्के धमनियों को ब्लॉक कर सकते हैं, जिसे रोकना बेहद जरूरी होता है।
ब्लड प्रेशर को सामान्य रखने से दिल पर दबाव कम होता है और आगे के हार्ट अटैक का जोखिम घटता है।
ये धमनियों में जमा कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करती हैं और नई ब्लॉकेज को रोकने में मदद करती हैं। इन दवाओं का सही समय पर सेवन और नियमित निगरानी हार्ट अटैक की गंभीरता को कम करने में मदद करती है।
जब हार्ट अटैक की वजह धमनियों में ब्लॉकेज होता है, तो दवाओं से ब्लॉकेज पूरी तरह नहीं खुल पाता है। ऐसे में डॉक्टर एंजियोप्लास्टी (Angioplasty) और स्टेंट लगाने की प्रक्रिया अपनाते हैं।
एक पतली ट्यूब (कैथेटर) धमनियों में ब्लॉकेज तक पहुंचाई जाती है, और वहां बलून के माध्यम से ब्लॉकेज को फैलाया जाता है।
ब्लॉकेज वाले हिस्से को खुला रखने के लिए धमनियों में स्टेंट रखा जाता है। स्टेंट धमनियों को स्थायी रूप से खुला रखने में मदद करता है और रक्त का प्रवाह बहाल करता है। इस प्रक्रिया से हार्ट की मांसपेशियों तक खून का सही प्रवाह लौटता है और गंभीर जटिलताओं की संभावना कम हो जाती है।
कभी-कभी हार्ट अटैक बहुत गंभीर होता है या धमनियों में बहुत अधिक ब्लॉकेज हो चुकी होती है। ऐसे मामलों में कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी (सीएबीजी) जीवनरक्षक साबित होती है। इस सर्जरी में ब्लॉक्ड धमनियों को बाईपास किया जाता है। यानी रक्त को नई पथ के माध्यम से हृदय तक पहुंचाया जाता है। गंभीर हार्ट अटैक, पुरानी ब्लॉकेज या कई धमनियों में अवरोध होने पर यह सबसे सुरक्षित और प्रभावी उपाय है। सर्जरी के बाद मरीज को रिकवरी और जीवनशैली सुधार पर विशेष ध्यान देना पड़ता है।
हार्ट अटैक के इलाज के साथ-साथ सर्दियों में जीवनशैली सुधार बेहद जरूरी है। सर्दियों में शरीर को गर्म रखना और भारी तनाव से बचना है। नमक, तैलीय और प्रोसेस्ड फूड से दूरी है। नियमित व्यायाम और संतुलित आहार है। डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं को समय पर लेना और फॉलो-अप करना है।
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डॉक्टरों का साफ कहना है कि सर्दियों में हार्ट अटैक का खतरा वास्तविक है, लेकिन सही सावधानी और समय पर इलाज से इसे टाला जा सकता है। ठंड को हल्के में न लें, नियमित हार्ट जांच (Heart test) कराएं और किसी भी लक्षण पर तुरंत नोएडा में सर्वश्रेष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट (Best cardiologist in Noida) से संपर्क करें। हार्ट अटैक के इलाज में देरी जानलेवा साबित हो सकती है। समय पर सही डॉक्टर से परामर्श और उचित उपचार से गंभीर नुकसान से बचा जा सकता है।
प्रश्न 1: क्या सर्दियों में हार्ट अटैक ज्यादा होता है?
उत्तर: हां, ठंड के कारण हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है। इसलिए सावधानी जरूरी है।
प्रश्न 2: ठंड में दिल पर सबसे ज्यादा असर क्यों पड़ता है?
उत्तर: धमनियां सिकुड़ने और ब्लड प्रेशर बढ़ने के कारण असर ज्यादा होता है। इसलिए सावधानी जरूरी है।
प्रश्न 3: सुबह टहलना सुरक्षित है या नहीं?
उत्तर: अत्यधिक ठंड में सुबह टहलना जोखिम भरा हो सकता है।
प्रश्न 4: हार्ट पेशेंट्स को सर्दियों में क्या खास सावधानी रखनी चाहिए?
उत्तर: गर्म कपड़े पहनें, दवाएं नियमित लें और जांच कराते रहें। ऐसा करने से खतरा कम होता है।
प्रश्न 5: हार्ट अटैक के लक्षण दिखें तो क्या करें?
उत्तर: देरी न करें और तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचें। इलाज में बिल्कुल भी देरी नहीं करनी चाहिए।