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अंडकोष की नसों में सूजन का इलाज क्या है जानिए इसके इलाज के लिए हॉस्पिटल

पुरुषों में पाई जाने वाली आम लेकिन गंभीर समस्या है। अंडकोष की नसों में सूजन, जिसे चिकित्सकीय भाषा में वैरिकोसील (Varicocele) कहते हैं। इस स्थिति में अंडकोष से रक्त को ऊपर ले जाने वाली नसों के वाल्व कमजोर होते हैं। यह सही से काम नहीं करते। जिससे खून उल्टा बहता है और नसें फैलकर सूजती हैं। यह सूजन धीरे-धीरे बढ़कर अंडकोष (testicles) में भारीपन, दर्द और असुविधा का कारण बनती है। कुछ मामलों में यह प्रजनन क्षमता को भी प्रभावित करती है।

 

वरिकोसिल ट्रीटमेंट डॉक्टर नोएडा में उपलब्ध है। इलाज में देर करने पर अंडकोष की कार्यक्षमता घटती है और शुक्राणुओं की संख्या व गुणवत्ता दोनों पर असर पड़ता है। अगर आप इस समस्या की जांच या इलाज के लिए भरोसेमंद यूरोलॉजी हॉस्पिटल की तलाश कर रहे हैं, तो नोएडा में सर्वश्रेष्ठ यूरोलॉजी अस्पताल (Best Urology Hospital in Noida) का चयन करना सबसे सही कदम है।

 

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अंडकोष की नसों में सूजन क्या है? (What is Varicocele)

अंडकोष की नसों में सूजन को चिकित्सकीय भाषा में वैरिकोसील (Varicocele) कहते हैं। यह स्थिति तब होती है। जब अंडकोष से रक्त को वापस ले जाने वाली नसों (veins) में वाल्व कमजोर होते हैं। काम करना बंद करते हैं। इससे खून उल्टा बहता है और नसों में रक्त जमा होता है। धीरे-धीरे ये नसें फैलती हैं और अंडकोष के ऊपर या बगल में गांठ जैसी सूजन महसूस होती है। जो अक्सर “केंचुए जैसी नसें” लगती हैं। यह समस्या ज्यादातर 15 से 35 वर्ष की उम्र के पुरुषों में दिखती है। अधिकतर मामलों में बाएं अंडकोष में होती है। समय पर इलाज न करने पर यह प्रजनन क्षमता  को प्रभावित करती है।

 

पुरुषों में इसके प्रमुख कारण (Main Causes of Varicocele in Men)


अंडकोष की नसों के वाल्व की कमजोरी या फेल होनाः

अंडकोष की नसों में एक तरह के छोटे वाल्व होते हैं जो रक्त को एक दिशा में ही प्रवाहित होते हैं। यदि ये वाल्व कमजोर या फेल हो जाएँ, तो रक्त पीछे की ओर लौट सकता है और नसों में फैलाव (डायलेशन) पैदा करता है।


ज्यादा समय तक खड़े रहने की आदतः

लंबे समय तक खड़े रहने से अंडकोष की नसों पर लगातार दबाव पड़ता है। इससे रक्त का प्रवाह बाधित होता है और नसों में सूजन या फैलाव बढ़ता है।


भारी वजन उठाना या अधिक स्ट्रेन देनाः

वजन उठाने या जोर लगाकर खांसने/पेशाब/दस्त आने जैसी गतिविधियों में पेट और अंडकोष की नसों पर दबाव बढ़ता है। यह नसों की दीवारों और वाल्व पर असर डालकर वैरिकोसील को जन्म देता है।


क्रॉनिक (लंबे समय तक चलने वाली) खांसी या कब्जः

लगातार खांसी या कब्ज से पेट में प्रेशर लगातार बढ़ता है। बढ़ा हुआ प्रेशर अंडकोष की नसों में रक्त के जमाव और फैलाव का कारण बनता है।


हार्मोनल असंतुलन या रक्त प्रवाह में रुकावटः

टेस्टोस्टेरोन और अन्य हार्मोन्स का असंतुलन नसों की लचीलापन और रक्त प्रवाह को प्रभावित करता है। कभी-कभी रेनल (किडनी) या अंडकोष की नसों में रक्त प्रवाह रुक जाने से भी वैरिकोसील होता है।


विरासत में मिली नसों की कमजोरीः

कुछ पुरुषों में जन्मजात रूप से नसों की दीवारें कमजोर होती हैं। यह कमजोरी वंशानुगत हो सकती है और रक्त प्रवाह को प्रभावित करती है।


अन्यः

मोटापा या अत्यधिक शराब सेवन, जो रक्त परिसंचरण और नसों की लचीलापन को प्रभावित करता है। पेट की चोट या सर्जरी के बाद होने वाला अस्थायी रक्त प्रवाह असंतुलन।


लक्षण और पहचान (Symptoms and Diagnosis)


अंडकोष में सूजन या गांठ जैसा उभारः

अक्सर अंडकोष के ऊपर या बगल में महसूस होता है। कभी-कभी यह दिखाई नहीं देता है। लेकिन हाथ से छूने पर महसूस होता है।


भारीपन या खिंचाव जैसा एहसासः

खासकर लंबे समय तक खड़े रहने, चलने या भारी काम करने पर। दर्द या असहजता धीरे-धीरे बढ़ती है।


हल्का या मद्धम दर्दः

आमतौर पर दिन में बढ़ता है और लेटने पर कम होता है। दर्द तीव्र या लगातार होने पर डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए।


शुक्राणु संख्या या गुणवत्ता में कमीः

कुछ पुरुषों में प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है। यह स्थिति लंबे समय तक अनदेखी रहने पर बांझपन का खतरा बढ़ाता है।


बांझपनः

यदि वैरिकोसील लंबे समय तक रहे, तो यह पुरुष बांझपन का कारण (Causes of male infertility) बनता है। अक्सर यह तब पता चलता है जब गर्भधारण में समस्या आती है।


दूसरे लक्षणः

एक या दोनों अंडकोष का आकार छोटा होना। अंडकोष में तापमान में हल्का बढ़ाव, जो शुक्राणु निर्माण को प्रभावित करता है।

 

वैरिकोसील की जांच के तरीके (Diagnostic Methods)


फिजिकल एग्जामिनेशनः

डॉक्टर खड़े और लेटे हुए दोनों स्थिति में अंडकोष की जांच करते हैं। नसों में फैलाव या गांठ का पता लगाने के लिए हाथ से महसूस किया जाता है।


कलर डॉपलर अल्ट्रासाउंडः

नसों में रक्त प्रवाह और फैलाव की सही स्थिति दिखाता है। लघु नसों और गहरे फैलाव का भी पता चलता है।


सिमेन एनालिसिसः


प्रजनन पर वैरिकोसील का प्रभाव जानने के लिए शुक्राणु की संख्या, गति और गुणवत्ता जांची जाती है। यह बांझपन के जोखिम का आंकलन करने में मदद करता है।


अन्य इमेजिंग तकनीकः

कभी-कभी सीटी स्कैन या एमआरआई की आवश्यकता होती है, खासकर अगर असामान्य रक्त प्रवाह या अन्य समस्या संदेहित हो।

 

वैरिकोसील का इलाज (Treatment Options for Varicocele)


वैरिकोसील का उपचार इसके आकार, लक्षण और प्रजनन क्षमता पर प्रभाव के आधार पर तय किया जाता है।


दवा और सपोर्टिव थैरेपीः

हल्के मामलों में दर्द और सूजन को कम करने के लिए डॉक्टर द्वारा दर्दनिवारक दवाएं सुझाई जाती हैं। स्क्रोटल सपोर्ट पहनने से नसों पर दबाव कम होता है और भारीपन की समस्या कम होती है। Specialized Urology Hospitals in Noida उपलब्ध है। जो वैरिकोसील के इलाज के लिए अत्याधुनिक तकनीक और अनुभवी यूरोलॉजिस्ट की टीम के साथ काम करते हैं। लाइफस्टाइल बदलाव जैसे लंबे समय तक खड़े रहने या भारी वजन उठाने से बचना, पेट की स्ट्रेन कम करना। नियमित फिजिकल एक्टिविटी और हल्का व्यायाम रक्त प्रवाह बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।


वैरिकोसील एम्बोलाइजेशनः

मिनिमली इनवेसिव तकनीक है, इसमें कोई बड़ा चीरा नहीं लगता है। रेडियोलॉजिस्ट (Radiologist) एक पतली ट्यूब (कैथेटर) नस में डालकर ब्लॉक करता है, ताकि रक्त वापस न बह सके। इससे सूजी हुई नसें सिकुड़ जाती हैं और दर्द/भारीपन कम होता है। इसके कई फायदे है। सर्जरी की तुलना में कम दर्द होता है। जल्दी रिकवरी होती। अस्पताल में रुकने का समय कम होता है।


सर्जिकल इलाज (Varicocelectomy Surgery)

वैरिकोसील का सबसे स्थायी और प्रभावी इलाज। इसके तीन प्रमुख प्रकार हैं:


ओपन वैरिकोसेलेक्टॉमीः

पारंपरिक तरीका होता है। सूजी नसों को बांधकर रक्त प्रवाह को रोका जाता है। रिकवरी समय मध्यम होता है।


माइक्रोसर्जिकल वैरिकोसेलेक्टॉमीः

माइक्रोस्कोप की मदद से नसों को सटीकता से अलग किया जाता है। रिस्क और वैरिकोसील की पुनरावृत्ति कम होती है। दर्द और जटिलताएं न्यूनतम होती है।


लेप्रोस्कोपिक वैरिकोसेलेक्टॉमीः

कुछ छोटे चीरे लगाकर कैमरा और उपकरणों से नसों को ठीक किया जाता है। कम दर्द, जल्दी रिकवरी होती है। अस्पताल में रुकने का समय कम होता है।


अन्य सहायक उपायः

  1. शारीरिक गतिविधियों का संतुलन: लंबे समय तक खड़े रहने या भारी काम से बचें।

  2. आहार और पोषण: विटामिन C, E और जैविक पदार्थ जो रक्त परिसंचरण सुधारते हैं।

  3. नियमित जांच: सर्जरी या एम्बोलाइजेशन के बाद प्रभावी परिणाम और शुक्राणु गुणवत्ता जांच।


यूरोलॉजी गाइडलाइन के तहत आधुनिक उपचार (Treatment under Urology Guidelines)


नवीनतम यूरोलॉजी गाइडलाइन के अनुसार वैरिकोसील का इलाज इस प्रकार किया जाता है:


सर्जरी की सिफारिशः

मध्यम से गंभीर वैरिकोसील वाले मरीज के लिए होती है। इंफर्टिलिटी (infertility) वाले मरीज के लिए या हल्के या बिना लक्षण वाले मामलों में दवा और लाइफस्टाइल बदलाव पहले सुझाए जा सकते हैं।


गोल्ड स्टैंडर्ड तकनीकः


माइक्रोसर्जिकल वैरिकोसेलेक्टॉमीः

सफलता दर सबसे अधिक होती है। साइड-इफेक्ट और रिकरेंस (पुनरावृत्ति) सबसे कम होता है। सूक्ष्म नसों को सुरक्षित रखते हुए केवल प्रभावित नसों को बांधा जाता है।


सर्जरी के बाद निगरानी और रिकवरीः

मरीज को 24 घंटे निगरानी में रखा जाता है। 1–2 दिन में घर जाने की अनुमति दी जाती है। हल्का दर्द या सूजन सामान्य, दर्दनिवारक दवाएं दी जाती हैं।


सामान्य जीवनशैली की वापसीः

3–4 सप्ताह में सामान्य जीवनशैली फिर से शुरू की जाती है। भारी व्यायाम या कठिन गतिविधियां 4–6 सप्ताह तक टालें।


सर्जरी के बाद सहायक उपायः

स्क्रोटल सपोर्ट पहनें। हल्का व्यायाम शुरू करने से पहले डॉक्टर से परामर्श लें। नियमित फॉलो-अप और सिमेन एनालिसिस से शुक्राणु गुणवत्ता जांचें।


अन्य आधुनिक विकल्पः

 

  • वैरिकोसील एम्बोलाइजेशनः मिनिमली इनवेसिव विकल्प होता है।

  • लेप्रोस्कोपिक सर्जरीः छोटे चीरे, कम दर्द, जल्दी रिकवरी होती है। मरीज की स्थिति और सुविधा के अनुसार तकनीक चुनी जाती है।

 

इलाज में देरी के खतरे (Complications of Delayed Treatment)

 

  • अंडकोष का सिकुड़ना

  • शुक्राणु की संख्या और गुणवत्ता में कमी

  • पुरुष बांझपन (Male infertility)

  • स्थायी दर्द और सूजन

  • लंबे समय में अंडकोष की कार्यक्षमता कम होना


जीवनशैली और घरेलू सावधानियां (Lifestyle and Home Care Tips)

 

  • वजन नियंत्रित रखें

  • भारी सामान उठाने से बचें

  • कब्ज या खांसी का इलाज कराएं

  • नियमित हल्की एक्सरसाइज करें

  • धूम्रपान और शराब से परहेज करें

  • लंबे समय तक खड़े रहने से बचें

  • स्क्रोटल सपोर्टर पहनें


डॉक्टर से कब मिलें? (When to See a Doctor)


अगर आपको निम्न लक्षण दिखें तो तुरंत यूरोलॉजिस्ट या एंड्रोलॉजिस्ट से संपर्क करें: —

 

  • अंडकोष में लगातार दर्द या सूजन

  • गांठ या नसों का उभार बढ़ना

  • प्रजनन में कठिनाई

  • अंडकोष का आकार घटना

  • बाईं ओर लगातार भारीपन या असुविधा

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निष्कर्ष (Conclusion)

अंडकोष की नसों में सूजन यानी वैरिकोसील पुरुषों में आम लेकिन संवेदनशील समस्या है। इसे नजरअंदाज करने से दर्द, सूजन और प्रजनन पर असर पड़ता है। माइक्रोसर्जिकल और लेप्रोस्कोपिक (Laparoscopic) तकनीक से अब इलाज सुरक्षित, तेज और प्रभावी होता है। समय पर विशेषज्ञ यूरोलॉजिस्ट से परामर्श लेकर उचित उपचार कराना ही सबसे बेहतर विकल्प है। इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए।

FAQs

प्रश्न 1: क्या वैरिकोसील खुद-ब-खुद ठीक होता है?

उत्तर: नहीं, वैरिकोसील अपने आप ठीक नहीं होता है। लक्षण बढ़ने या प्रजनन पर असर पड़ने पर सर्जरी ही स्थायी समाधान है।

प्रश्न 2: क्या इससे बच्चे होने में दिक्कत होती है?

उत्तर: हां, लंबे समय तक अनुपचारित वैरिकोसील शुक्राणुओं की गुणवत्ता और संख्या को कम करता है। जिससे गर्भधारण में दिक्कत होती है।

प्रश्न 3: सर्जरी के बाद कितने दिन में ठीक हो सकते हैं?

उत्तर: अधिकांश मरीज 1–2 दिन में घर जाते हैं। लगभग 2–3 हफ्तों में सामान्य कार्य करने लगते हैं।

प्रश्न 4: क्या सर्जरी के बाद दोबारा वैरिकोसील हो सकता है?

उत्तर: अगर सर्जरी माइक्रोसर्जिकल तकनीक से की जाए तो दोबारा होने की संभावना बहुत कम होती है।

प्रश्न 5: क्या लेप्रोस्कोपिक वैरिकोसील सर्जरी सुरक्षित है?

उत्तर: हां, यह सुरक्षित और कम दर्द वाली प्रक्रिया है। इसमें जल्दी रिकवरी और लंबे समय तक राहत मिलती है।

Written and verified by:
Dr. Bhanwar Lal Barkesiya

Dr. Bhanwar Lal Barkesiya

MBBS, MS, FMAS & MCH (GOLD MEDALIST) | Exp: 15 Yr
Urology

Dr. Bhanwar Lal Barkesiya is an MCh Gold Medalist Urologist with 15+ years of experience in laser kidney stone surgery, TURP, PCNL, robotic urology, and complex urological care at Felix Hospitals, Noida.