Subscribe to our
सर्दियों में बच्चों को बुखार होना एक आम समस्या है। मगर माता-पिता के लिए यह समझना सबसे मुश्किल होता है कि बच्चे का बुखार वायरल है या बैक्टीरियल। गलत समय पर गलत इलाज से बीमारी बढ़ सकती है। सही पहचान और समय पर उपचार से बच्चे पूरी तरह स्वस्थ होते हैं। नोएडा में सर्वश्रेष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ उपलब्ध है। नोएडा में बच्चों के बुखार, वायरल फीवर और बैक्टीरियल इंफेक्शन के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध हैं। इलाज में देरी बच्चे के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होती है।
बच्चों की जांच या इलाज के लिए संपर्क करें:+91 9667064100
सर्दियों में ठंडी हवा, कम नमी और वायरल संक्रमण तेजी से फैलते हैं। जिससे बच्चों को बुखार होने का खतरा बढ़ता है। बच्चों की इम्यूनिटी पूरी तरह विकसित न होने के कारण वे जल्दी संक्रमित होते हैं। स्कूल, डे-केयर, भीड़भाड़ और बढ़ता प्रदूषण भी संक्रमण को फैलाने में अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए सर्दियों में बच्चों को बुखार जल्दी होता है। इसके मुख्य कारणों में वायरल संक्रमण जैसे फ्लू, आरएसवी और एडेनोवायरस, बैक्टीरियल इंफेक्शन, गले-कान-फेफड़ों का संक्रमण और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली शामिल हैं।
बुखार की पहचान केवल तापमान से नहीं, बल्कि लक्षणों, अवधि और जांच रिपोर्ट से होती है। संकेत जिनसे फर्क समझ सकते हैं:
बुखार कितने दिन से है
बुखार के साथ खांसी, जुकाम या दस्त
बच्चा एक्टिव है या बहुत सुस्त
दवा से बुखार उतरता है या नहीं
वायरल बुखार और बैक्टीरियल बुखार के बीच कई महत्वपूर्ण अंतर होते हैं। वायरल बुखार आमतौर पर 3 से 5 दिनों तक रहता है और इसमें बुखार हल्का से मध्यम होता है। बुखार में एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती है। क्योंकि यह वायरस के कारण होता है। इसके लक्षणों में जुकाम, खांसी, बदन दर्द, सिर दर्द और कभी-कभी हल्की कमजोरी शामिल होती है। अधिकतर मामलों में वायरल बुखार (viral fever) आराम, तरल पदार्थ और सामान्य दवाओं से अपने आप ठीक होता है।
वहीं दूसरी ओर बैक्टीरियल बुखार की अवधि 5 से 7 दिनों या उससे अधिक होती है। इसमें बुखार तेज व लगातार बना रहता है। इस स्थिति में एंटीबायोटिक दवाएं देना जरूरी होता है। क्योंकि संक्रमण बैक्टीरिया के कारण होता है। इसके लक्षण आमतौर पर अधिक गंभीर होते हैं, जैसे गले में पस पड़ना, सांस लेने में दिक्कत, तेज कमजोरी या शरीर के किसी विशेष हिस्से में दर्द है। सही समय पर जांच और उचित दवा से बैक्टीरियल बुखार ठीक होता है, लेकिन इलाज में देरी होने पर यह गंभीर रूप भी लेता है।
100–102°F तक बुखार
नाक बहना या बंद होना
खांसी, गले में खराश
बदन दर्द और थकान
भूख कम लगना
कभी-कभी दस्त या उल्टी
102°F से अधिक तेज बुखार
बुखार 5 दिन से ज्यादा
गले में सफेद दाने या पस
सांस लेने में परेशानी
अत्यधिक कमजोरी
कान या छाती में दर्द
डॉक्टर मरीज के लक्षणों को ध्यान में रखते हुए सही कारण जानने के लिए आवश्यक जांच करवाते हैं।
सबसे पहले सीबीसी (कम्प्लीट ब्लड काउंट) कराया जाता है। जिससे यह पता चलता है कि शरीर में संक्रमण है या नहीं और वह वायरल है या बैक्टीरियल। इसमें हीमोग्लोबिन, सफेद रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स की स्थिति का आकलन किया जाता है।
सीआरपी और ईएसआर टेस्ट किए जाते हैं। जो शरीर में सूजन और संक्रमण की गंभीरता को दर्शाते हैं। इनकी मात्रा बढ़ी हुई होने पर बैक्टीरियल संक्रमण की आशंका अधिक होती है।
अगर बुखार ज्यादा दिन तक बना रहे या विशेष लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर डेंगू, मलेरिया और टायफाइड जैसे संक्रमणों की जांच भी करवाते हैं, खासकर बरसात और सर्दियों के मौसम में।
अगरमरीज को सांस लेने में दिक्कत, तेज खांसी या सीने में दर्द हो, तो चेस्ट एक्स-रे कराया जाता है, जिससे फेफड़ों के संक्रमण या निमोनिया जैसी स्थिति का पता लगाया जा सके।
पेशाब में जलन, बार-बार पेशाब आना या गले में तेज दर्द और पस होने की स्थिति में यूरिन टेस्ट या थ्रोट स्वैब टेस्ट कराया जाता है। जिससे संक्रमण के सही स्रोत की पहचान कर उचित इलाज शुरू किया जा सके।
वायरल बुखार में सबसे जरूरी है बच्चे को पर्याप्त आराम देना, ताकि शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली संक्रमण से लड़ सके। नोएडा में सर्वश्रेष्ठ बाल चिकित्सालय उपलब्ध है। बच्चे को गुनगुना पानी, सूप, दूध, जूस और अन्य तरल पदार्थ अधिक मात्रा में देने चाहिए, जिससे डिहाइड्रेशन न हो और शरीर से टॉक्सिन बाहर निकल सकें। बुखार या शरीर दर्द होने पर डॉक्टर की सलाह से केवल पैरासिटामोल दी जाती है। वायरल बुखार में एंटीबायोटिक असरदार नहीं होती, इसलिए इसकी जरूरत नहीं होती। सही देखभाल, आराम और पोषण से वायरल बुखार आमतौर पर अपने आप ठीक हो जाता है।
बैक्टीरियल बुखार में डॉक्टर द्वारा निर्धारित एंटीबायोटिक दवाएं देना जरूरी होता है। क्योंकि यह संक्रमण बैक्टीरिया के कारण होता है। एंटीबायोटिक का पूरा कोर्स समय पर और सही मात्रा में करना बहुत जरूरी है। भले ही बच्चे की हालत पहले बेहतर क्यों न लगने लगे। गंभीर स्थिति, तेज बुखार, सांस की परेशानी या अन्य जटिलताओं में बच्चे को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता भी पड़ सकती है, ताकि उसकी लगातार निगरानी और सही इलाज किया जा सके।
बच्चे को ठंड से बचाएं
हाथ धोने की आदत डालें
भीड़भाड़ से दूरी
संतुलित आहार (फल, सब्जियां, दूध)
पर्याप्त नींद
समय पर टीकाकरण
शुरुआती बुखार, सर्दी-खांसी, हल्का संक्रमण या सामान्य कमजोरी की स्थिति में सबसे पहले पीडियाट्रिशियन से संपर्क करना चाहिए। वह बच्चे की उम्र, वजन और लक्षणों के अनुसार जांच कर सही दवा और देखभाल की सलाह देते हैं। यह तय करते हैं कि बुखार वायरल है या बैक्टीरियल। यदि बच्चे को सांस लेने में दिक्कत, लगातार खांसी, सीने में जकड़न, घरघराहट, बार-बार निमोनिया या फेफड़ों से जुड़ी समस्या हो, तो पीडियाट्रिक पल्मोनोलॉजिस्ट से परामर्श जरूरी होता है। यह विशेषज्ञ फेफड़ों और श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारियों का गहराई से इलाज करते हैं। नवजात शिशु (0–28 दिन) में बुखार, दूध न पीना, सुस्ती, सांस की परेशानी या कोई भी असामान्य लक्षण दिखने पर तुरंत नियोनेटोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए। नवजातों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बहुत कमजोर होती है, इसलिए मामूली लक्षण भी गंभीर हो सकते हैं और विशेषज्ञ देखभाल आवश्यक होती है।
नोएडा में बच्चों के विशेषज्ञ डॉक्टर से अपॉइंटमेंट: +91 9667064100
सर्दियों में बच्चों का बुखार आम है। लेकिन यह वायरल या बैक्टीरियल होता है। सही समय पर पहचान और उचित इलाज से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है। माता-पिता को बुखार की अवधि, लक्षण और बच्चे की गतिविधियों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए। बिना जांच और डॉक्टर की सलाह के बिना किसी भी प्रकार की दवा का सेवन नहीं करना चाहिए।
प्रश्न 1: बच्चों में वायरल बुखार कितने दिन रहता है?
उत्तर: आमतौर पर 3–5 दिन होता है। अगर इससे ज्यादा बुखार है तो डॉक्टर की सलाह पर जांच और इलाज कराना चाहिए।
प्रश्न 2: क्या हर बुखार में एंटीबायोटिक जरूरी है?
उत्तर: नहीं, केवल बैक्टीरियल इंफेक्शन में होता है। किसी भी प्रकार की एंटीबायोटिक दवा का सेवन डॉक्टर की सलाह से करना चाहिए।
प्रश्न 3: बुखार में कब अस्पताल ले जाना चाहिए?
उत्तर: सांस की तकलीफ, बहुत तेज बुखार या सुस्ती होने पर।
प्रश्न 4: सर्दियों में बुखार ज्यादा क्यों होता है?
उत्तर: ठंडी हवा और वायरल संक्रमण की वजह से ज्यादा होता है। इसलिए ठंडी हवा और वायरल से दूर के हर संभव प्रयास करना चाहिए।
प्रश्न 5: क्या टीकाकरण से बुखार से बचाव होता है?
उत्तर: हां, कई गंभीर संक्रमणों से बचाव होता है। इसलिए बचपन में डॉक्टर की सलाह पर बच्चों को सभी प्रकार का टीका लगाना चाहिए।