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मानव हृदय में पंपिंग हृदय की नियमित धड़कनों से संचालित होती है। यह सामान्यतः प्रति मिनट 60 से 100 बार होती हैं। मगर जब दिल का नेचुरल पावर सिस्टम बार-बार असफल होने लगे तो पेसमेकर (Pacemaker) की आवश्यकता होती है। यह एक छोटा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण होता है जो दिल की धड़कन को नियमित रखने के लिए जरूरी इलेक्ट्रिक सिग्नल देता है। इस लेख में हम यह जानेंगे कि पेसमेकर कैसे काम करता है। इसे कैसे लगाया जाता है साथ ही अगर आप इसके बारे में और जानना चाहते है या आप भी अपने हृदय की गति को नहीं समझ पा रहे है तो समय रहते अच्छे हृदय हॉस्पिटल को दिखाना बेहद ज़रूरी होता है।
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दिल की गति कैसे नियंत्रित करता है पेसमेकर? (How Does a Pacemaker Control Heart Rate?)
पेसमेकर की निगरानी और फॉलोअप (Monitoring and Follow-up of Pacemaker)
पेसमेकर एक इलेक्ट्रॉनिक चिकित्सा उपकरण है। जिसे हृदय की असामान्य धड़कन को सामान्य करने के लिए शरीर में इम्प्लांट करते हैं। यह डिवाइस दिल में इलेक्ट्रिक सिग्नल्स भेजकर हृदय की धड़कन को नियंत्रित करती है। जिससे रक्तसंचार नियमित रहता है। पेसमेकर का उद्देश्य हृदय गति को सामान्य सीमा बनाए रखना है। इसे विद्युत संकेत भेजकर धड़कन को ट्रिगर करना होता है। खासतौर जब दिल की अपनी प्रणाली असफल हो तो। यह एरिदमिया के लक्षणों को कम करना यानी चक्कर आने, थकान, बेहोशी के मामलों में दिल की पंपिंग क्षमता को सुधारता है।
| प्रकार | विवरण | उपयोग की स्थिति |
| स्थायी पेसमेकर | एक छोटा डिवाइस जो त्वचा के नीचे (छाती में) स्थायी रूप से ट्रान्सप्लान्ट करते हैं। | पुरानी ब्रैडीकार्डिया, एवी ब्लॉक, हार्ट फेल्योर होने पर उपयोगी। |
| अस्थायी पेसमेकर | एक अल्पकालिक डिवाइस जो बाहर से दिल में विद्युत संकेत भेजती है। | आपातकालीन स्थिति, सर्जरी के बाद, संक्रमण या बैटरी फेल्योर में |
नोटः स्थायी पेसमेकर बैटरी द्वारा संचालित होता है जो वर्षों तक कार्य करता है। अस्थायी पेसमेकर आमतौर पर कुछ हफ्तों के लिए लगाते हैं।
दिल की धड़कन एक स्वतः उत्पन्न होने वाली विद्युत प्रणाली से नियंत्रित होती है। जिसे हृदय की कंडक्शन सिस्टम कहते हैं। इसके प्रमुख घटक हैं सिनोएट्रियल नोड (एसए नोड)। इसे दिल का प्राकृतिक पेसमेकर कहते हैं। यह दाएं एट्रीयम में स्थित होता है। प्रति मिनट 60–100 बार विद्युत सिग्नल उत्पन्न करता है। एट्रियोवेंट्रिकुलर नोड (एवी नोड) सिग्नल को निचले कक्षों (वेंट्रिकल्स) तक पहुंचाता है। जिससे दिल का संकुचन नियंत्रित होता है। बंडल ऑफ हिज और परकिन्जी फाइबर्स दिल के विभिन्न हिस्सों में सिग्नल भेजते हैं। जिससे धड़कन समन्वित रूप से हो। जब यह प्रणाली सही ढंग से काम करती है, तो दिल की धड़कन नियमित रहती है।
जब एस.ए. नोड कमजोर हो जाती है या ए.वी. नोड में ब्लॉक हो जाता है, तो हृदय की धड़कन प्रभावित हो सकती है, इससे धड़कन धीमी होती है, दिल की लय अनियमित होती है। मस्तिष्क और अंगों को पर्याप्त रक्त नहीं मिलता है। ऐसे में पेसमेकर कृत्रिम रूप से विद्युत संकेत उत्पन्न करता है, जिससे दिल सामान्य गति से धड़कता है।
पेसमेकर में एक छोटा कंप्यूटर डिवाइस और बैटरी होती है। यह डिवाइस छाती की त्वचा के नीचे इम्प्लांट होती है। इससे जुड़ी लीड्स दिल की मांसपेशियों तक जाती है। जब पेसमेकर को संकेत मिलता है कि दिल की धड़कन सामान्य नहीं है तो यह कम वोल्टेज का विद्युत संकेत भेजता है। जिससे दिल संकुचित होता है। धड़कन चालू रहती है।
पेसमेकर को उनकी संरचना और हृदय के संकेत भेजने के आधार पर विभिन्न श्रेणियों में बांटते हैं। चिकित्सक मरीज की स्थिति को देखते हुए पेसमेकर लगाते हैं।
-सिंगल चेंबर पेसमेकर: इस प्रकार के पेसमेकर में केवल एक लीड होती है। जो दायां आलिंद या दायां निलय (हृदय का एक कक्ष है, जो फेफड़ों में रक्त पंप करता है) में स्थित होता है। यह पेसमेकर तब उपयोग में आता है जब केवल दिल का एक कक्ष ठीक से कार्य नहीं कर रहा होता है।
-ड्यूल चेंबर: पेसमेकर में दो लीड होती हैं। एक ह्रदय का एक भाग में दूसरी दायां वेंट्रिकल में यह पेसमेकर दोनों चेंबरों की क्रिया को समन्वित करता है। जिससे हृदय लय अधिक बनी रहती है। एवी सिंक्रोनाइजेशन बना रहता है।
-बाईवेंट्रिकुलर पेसमेकर (सीआरटी - कार्डिएक रीसिंक्रोनाइजेशन थेरेपी): यह विशेष पेसमेकर तीन लीड्स का प्रयोग करता है। इसका उद्देश्य हृदय के दोनों वेंट्रिकल्स को एक साथ संकुचित करना है। जिससे पंपिंग क्षमता सुधरे। यह हृदय विफलता वाले मरीजों में उपयोगी होता है।
पेसमेकर का प्रत्यारोपण एक अपेक्षाकृत सुरक्षित और कम समय लेने वाली प्रक्रिया है। आमतौर पर स्थानीय एनेस्थीसिया के तहत होती है। यह प्रक्रिया हृदय रोग विशेषज्ञों द्वारा विशेष रूप से तैयार कैथ लैब या ऑपरेशन थिएटर में होती है।
पहले मरीज को भर्ती किया जाता है। फिर छाती के ऊपरी हिस्से को साफ कर स्थानीय एनेस्थीसिया दिया जाता है। ईसीजी और ब्लड प्रेशर की लगातार निगरानी होती है।
डॉक्टर सबक्लेवियन वेन (कंधे के पास की नस) से एक या अधिक लीड्स को हृदय के अंदर गाइड करते हैं। लीड्स को दिल की दीवार से जोड़ते है। विद्युत गतिविधि को जांच करते हैं।
लीड्स को पेसमेकर डिवाइस से जोड़ते हैं। डिवाइस को त्वचा के नीचे लगाया जाता है। आमतौर पर बाएं कंधे के नीचे लगाया जाता है। फिर पेसमेकर को प्रोग्राम किया जाता है। जिससे वह सही दर से धड़कन को नियंत्रित करें। एक बार सटीक कार्यप्रणाली की पुष्टि होने पर
घाव को बंद कर करते हैं। प्रक्रिया में आमतौर पर 1 से 2 घंटे लगते हैं।
पेसमेकर लगने के बाद जरूरी जहां इसे लगाया है कि वहां के हाथ को 1-2 हफ्ते तक ऊंचा न उठाएं। घाव को सूखा और साफ रखें। भारी वस्तुएं उठाने से बचें। मोबाइल फोन को सीधे पेसमेकर के ऊपर न रखें। डॉक्टर द्वारा निर्धारित फॉलोअपकर जांच कराते रहें।
पेसमेकर एक बार इम्प्लांट करने के बाद रखरखाव की जरूरत होती है। जिससे यह पता चल सके कि डिवाइस सही काम कर रही है कि नहीं। बैटरी पर्याप्त है या नहीं। इसलिए टेलीमॉनिटरिंग के लिए इम्प्लांट के 7–14 दिन बाद नियमित चेकअप कराएं। फिर हर 3–6 महीने में एक बार या डॉक्टर की सलाह लें। डॉक्टर इस दौरान पेसमेकर के सिग्नल और कार्यप्रणाली की जांच जांच करते हैं।
लीड्स की स्थिति और प्रतिक्रिया का मूल्यांकन करते हैं। बैटरी स्टेटस देखते हैं। तकनीकी खराबी या संक्रमण के लक्षणों की पहचान कर जांच करते हैं। आधुनिक पेसमेकर में वायरलेस ट्रांसमिशन की सुविधा होती है। यह तकनीक मरीज के पेसमेकर से डाटा कार्डियोलॉजिस्ट को दूर से भेजती है। अचानक आई कोई समस्या को तत्काल अलर्ट करती है।
बैटरी की औसत आयु सामान्यत 8 से 12 वर्ष होती है। यह इस पर निर्भर करता है कि पेसिंग कितनी बार आवश्यक हो रही है। जब बैटरी खत्म होने पर पहुंचती है तो कार्डियोलॉजिस्ट(Cardiologist) सर्जरी की सलाह देते हैं। इस दौरान लीड्स को नहीं बदला जाता।
केवल डिवाइस का जनरेटर भाग बदला जाता है। यह प्रक्रिया आमतौर पर 30–60 मिनट में पूरी हो जाती है। हालांकि बैटरी पूरी तरह खत्म होने से पहले रिप्लेसमेंट जरूरी होता है, जिससे आपात स्थिति न आए। नोएडा में बहुत अच्छी कीमत पर आपको पेसमेकर की सलाह मिल जाएगी उसके लिए आपको अच्छे अस्पताल से सम्पर्क करना बेहद आवश्यक है।
पेसमेकर लगाने के बाद अधिकांश मरीज सामान्य और सक्रिय जीवन जीते हैं। यह डिवाइस दिल की गति को नियंत्रित करने के साथ दिनचर्या को आत्मबल देता है। मरीज सामान्य रूप से चलते हैं। काम पर जा सकते हैं। सामाजिक जीवन जी सकते हैं। हल्का शारीरिक श्रम, योग, ध्यान शुरू कर सकते हैं। कुछ हफ्तों बाद वाहन चलाना, कार्यस्थल लौटना, हल्की यात्रा कर सकते हैं।
कुछ उपकरणों की विद्युतचुंबकीय तरंगें (ईएमआई) पेसमेकर के कार्य को प्रभावित करती हैं। इसलिए उनसे सावधानी आवश्यक है।
मोबाइल फोन को पेसमेकर से कम से कम 15-20 सेमी (6 इंच) दूर रखें। कॉल के समय फोन को पेसमेकर वाले हिस्से से विपरीत कान पर रखें।
वेल्डिंग मशीन, औद्योगिक मोटर, जनरेटर जैसे उपकरणों से दूरी रखें। हाई वोल्टेज वाले स्थानों पर अधिक समय न बिताएं।
हवाई अड्डे, शॉपिंग मॉल आदि में उपयोग होने वाले सुरक्षा स्कैनर और मेटल डिटेक्टर प्रभावित कर सकते हैं। इन स्थानों पर पेसमेकर कार्ड दिखाकर वैकल्पिक चेकअप की मांग करें।
माइक्रोवेव का सामान्य उपयोग ठीक है, लेकिन बहुत पास जाकर देखने या छेड़छाड़ करने से बचें।
हल्का व्यायाम जैसे टहलना, साइकिल चलाना, स्विमिंग (कुछ हफ्तों बाद) कर सकते हैं। तीव्र व्यायाम या जिम से पहले डॉक्टर की सलाह जरूरी है।
हवाई यात्रा की अनुमति होती है लेकिन एयरपोर्ट पर पेसमेकर कार्ड दिखाना चाहिए। पेसमेकर डिवाइस के साथ अंतरराष्ट्रीय यात्रा करते समय पेसमेकर आईडी कार्ड अपने पास रखें।
कार्डियोलॉजिस्ट पेसमेकर को इम्प्लांटेशन (Cardiologist Pacemaker Implantation Procedure) प्रक्रिया करते हैं। पेसमेकर की प्रोग्रामिंग और सेटिंग्स को अनुकूलित बनाते हैं। नियमित फॉलोअप करते हैं। जीवनशैली संबंधी सलाह देते हैं। पेसमेकर के बारे में जानने के लिए आप नोएडा के अच्छे कार्डियोलॉजिस्ट से संपर्क कर सकते है। कार्डियोलॉजिस्ट न केवल पेसमेकर की तकनीकी निगरानी करते हैं, बल्कि मरीज की हृदय-स्वास्थ्य योजना का जानकारी देते हैं।
समय पर जांच और इलाज बेहद आवश्यक है। आज ही फेलिक्स हॉस्पिटल्स में संपर्क करें और आज ही अपना अपॉइंटमेंट बुक करें। ज्यादा जानकारी के लिए हमें कॉल करें +91 9667064100.
पेसमेकर एक जीवनरक्षक उपकरण है। यह न केवल हृदय की धीमी या अनियमित धड़कनों को सामान्य करता है, बल्कि मरीज को एक सक्रिय, सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने की शक्ति देता है। बावजूद अगर यदि किसी को बार-बार चक्कर आना, थकान, बेहोशी या धीमी हृदय गति की शिकायत हो, तो देर न करें। कार्डियोलॉजिस्ट से शीघ्र परामर्श करें और आवश्यक जांच कराएं। समय रहते पेसमेकर का निर्णय लेना भविष्य के लिए सुरक्षा कवच साबित होता है।
प्रश्न-1: क्या पेसमेकर से दिल मशीन पर निर्भर होता है?
उत्तर: पेसमेकर एक उपकरण है, जब दिल की प्राकृतिक प्रणाली काम करती है तो पेसमेकर हस्तक्षेप नहीं करता।
प्रश्न-2: पेसमेकर के सिग्नल क्या दर्दनाक हैं ?
उत्तर: मरीज को पेसमेकर द्वारा भेजे गए विद्युत सिग्नल का कोई अहसास या दर्द नहीं होता है।
प्रश्न-3: क्या मोबाइल फोन या अन्य उपकरण पेसमेकर को प्रभावित करते हैं?
उत्तर: आधुनिक पेसमेकर ईएमआई (विद्युत चुम्बकीय हस्तक्षेप) से सुरक्षित होते हैं। लेकिन फिर भी मोबाइल को पेसमेकर वाली छाती के विपरीत तरफ रखना और दूरी बनाए रखना चाहिए।
प्रश्न-4: क्या पेसमेकर के साथ एमआरआई कराया जाता है?
उत्तर: अगर आपने एमआरआई संगत पेसमेकर लगवाया है, तो सावधानी जरूरी है। मगर एमआरआई (MRI) से पहले कार्डियोलॉजिस्ट से अनुमति आवश्यक है।
प्रश्न-5: पेसमेकर के साथ सामान्य जीवन संभव है?
उत्तर: पेसमेकर लगने के बाद मरीज सामान्य दिनचर्या, यात्रा, हल्का व्यायाम और सामाजिक गतिविधियां करता है। बस कुछ बुनियादी सावधानियां जरूरी हैं।
प्रश्न-6: पेसमेकर की बैटरी कब बदल जाती है?
उत्तर: पेसमेकर की बैटरी आठ से 12 साल तक चलती है। जब बैटरी लो हो जाती है। तो कार्डियोलॉजिस्ट समय रहते उसका रिप्लेसमेंट सुझाते हैं।