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सर्दियों का मौसम बच्चों के लिए कई तरह की त्वचा समस्याएं लेकर आता है। ठंडी हवा, कम नमी और गर्म पानी से नहाने की आदत बच्चों की त्वचा को रूखा, बेजान और संवेदनशील बनाती है। इस कारण बच्चों में रूखी त्वचा, चकत्ते, विंटर रैश, खुजली और स्किन एलर्जी की समस्या आम होती है। शिशुओं और छोटे बच्चों की त्वचा बहुत नाजुक होती है। इसलिए सर्दियों में विशेष देखभाल जरूरी होती है। बच्चों की त्वचा रोग के लिए डॉक्टर नोएडा में उपलब्ध है। बच्चों की स्किन एलर्जी और विंटर रैश का इलाज उपलब्ध है।
सर्दियों में वातावरण में नमी कम होती है। ठंडी हवा त्वचा की ऊपरी परत से प्राकृतिक नमी छीनती है। बच्चों की त्वचा में तेल ग्रंथियां पूरी तरह विकसित नहीं होतीं है। इसलिए उनकी त्वचा जल्दी ड्राय हो जाती है। इसके अलावा गर्म पानी से नहाना, साबुन का अधिक इस्तेमाल और पर्याप्त मॉइस्चराइजर न लगाना रूखेपन को बढ़ाता है।
ठंडी और शुष्क हवा
कम पानी पीना
गर्म पानी से बार-बार नहाना
तेज़ केमिकल वाले साबुन या बॉडी वॉश
ऊनी या सिंथेटिक कपड़ों की रगड़
त्वचा पर तेल या मॉइस्चराइजर न लगाना
एग्जिमा या एलर्जी की पारिवारिक हिस्ट्री
सर्दियों में बच्चों की त्वचा जब अत्यधिक सूखती है। तो उसकी सुरक्षा परत कमजोर होती है। इससे त्वचा पर लाल धब्बे, पपड़ी, खुजली और चकत्ते बनने लगते हैं। कई बार पसीना, ऊनी कपड़ों की रगड़ या एलर्जिक रिएक्शन भी विंटर रैश का कारण बनते हैं।
सर्दियों में हवा में नमी कम होती है। जिससे त्वचा का नैचुरल ऑयल खत्म होने लगता है। इसके कारण त्वचा रूखी, खिंची हुई और फटी-फटी सी नजर आने लगती है। कई बार एड़ियों, हाथों और होंठों पर गहरी दरारें भी पड़ जाती हैं, जिनसे दर्द और जलन होती है।
ठंड से बचाव के लिए लोग सीधे ऊनी कपड़े पहन लेते हैं। लेकिन यह त्वचा पर रैशेज, खुजली और लाल चकत्तों का कारण बन सकता है। खासकर बच्चों और संवेदनशील त्वचा वाले लोगों में यह समस्या ज्यादा दिखती है।
कपड़े धोने में इस्तेमाल होने वाले तेज खुशबूदार डिटर्जेंट और फैब्रिक सॉफ्टनर त्वचा एलर्जी की बड़ी वजह बनते हैं। इनके केमिकल त्वचा के संपर्क में आकर खुजली, जलन और चकत्ते पैदा करते हैं।
सर्दियों में कोहरा, धुआं और प्रदूषण बढ़ता है। हवा में मौजूद धूल के कण और जहरीली गैसें त्वचा के रोमछिद्रों को बंद कर देती हैं, जिससे एलर्जी, मुंहासे और खुजली की समस्या बढ़ती है।
जिन लोगों को पहले से एग्जिमा या अन्य स्किन डिजीज होती है। उनमें सर्दियों में लक्षण ज्यादा गंभीर होते हैं। त्वचा अत्यधिक सूखी होकर लाल, मोटी और खुजलीदार हो जाती है, जिससे संक्रमण का खतरा भी बढ़ता है।
लगातार खुजली होने पर लोग त्वचा को बार-बार खुजलाते हैं। इससे त्वचा पर घाव बन सकते हैं और बैक्टीरियल या फंगल इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ता है।
त्वचा का खिंचाव और रूखापन
लाल या गुलाबी चकत्ते
खुजली और जलन
त्वचा पर पपड़ी या छिलना
गाल, हाथ, पैर और गर्दन पर अधिक असर
गंभीर मामलों में खून आना या संक्रमण
सर्दियों का मौसम बच्चों के लिए कई तरह की त्वचा समस्याएं लेकर आता है। ठंडी हवा, नमी की कमी और गर्म पानी से बार-बार नहलाने की आदत बच्चों की कोमल त्वचा को रूखा और संवेदनशील बनाती है। ऐसे में सही देखभाल न की जाए तो ड्राय स्किन, खुजली, लाल चकत्ते और एलर्जी की शिकायत बढ़ाती है।
सर्दियों में बहुत गर्म पानी से नहलाने पर त्वचा की प्राकृतिक नमी खत्म होती है। इससे त्वचा रूखी और खिंची हुई महसूस होती है। बच्चों को हमेशा हल्के गुनगुने पानी से ही नहलाना चाहिए।
बच्चों को लंबे समय तक पानी में रखने से त्वचा का नैचुरल ऑयल निकल जाता है। इसलिए नहाने का समय 5 से 10 मिनट तक ही रखें और रोजाना नहलाने की बजाय जरूरत अनुसार ही स्नान कराएं।
तेज खुशबू और केमिकल युक्त साबुन बच्चों की त्वचा में जलन और एलर्जी पैदा करते हैं। बच्चों के लिए हमेशा माइल्ड, पीएच-बैलेंस्ड और खुशबू-रहित बेबी सोप या क्लींजर का प्रयोग करना चाहिए।
नहाने के बाद जब त्वचा थोड़ी नम हो। उसी समय मॉइस्चराइजर या बेबी ऑयल लगाना सबसे प्रभावी होता है। इससे त्वचा में नमी लॉक हो जाती है और रूखापन कम होता है।
अगर बच्चे की त्वचा बहुत ड्राय रहती है तो केवल नहाने के बाद ही नहीं, बल्कि दिन में 2 से 3 बार मॉइस्चराइजर लगाना चाहिए। खासतौर पर हाथ, पैर, चेहरे और होंठों पर ध्यान दें।
सीधे ऊनी कपड़े पहनाने से बच्चों की त्वचा में खुजली और रैशेज होते हैं। इसलिए ऊनी कपड़ों के नीचे हमेशा सूती कपड़े पहनाएं ताकि त्वचा सुरक्षित रहे और पसीना भी ठीक से सोख लिया जाए।
त्वचा की सेहत केवल बाहरी देखभाल से ही नहीं, बल्कि अंदरूनी पोषण से भी जुड़ी होती है। बच्चों को पर्याप्त पानी पिलाएं और आहार में फल, सब्जियां, दूध, घी और ड्राई फ्रूट्स शामिल करें, जिससे त्वचा स्वस्थ बनी रहे।
सर्दियों में खुजली आम समस्या है। बच्चे अनजाने में त्वचा को खुजलाते हैं। जिससे घाव और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए बच्चों के नाखून हमेशा छोटे और साफ रखें।
डॉक्टर बच्चों के लिए विशेष मॉइस्चराइजिंग क्रीम या ऑइंटमेंट बताते हैं, जो त्वचा की नमी बनाए रखते हैं।
अगर खुजली ज्यादा हो, तो एंटीहिस्टामिन सिरप दिया जाता है (डॉक्टर की सलाह से)
गंभीर लालिमा या एग्ज़िमा में कम शक्ति वाली स्टेरॉयड क्रीम सीमित समय के लिए दी जाती है।
अगर त्वचा पर पस, सूजन या बुखार हो, तो एंटीबायोटिक या एंटीफंगल इलाज किया जाता है।
सर्दियों के मौसम में बच्चों की त्वचा अक्सर रूखी, खिंची हुई और संवेदनशील होती है। नमी की कमी, ठंडी हवा और गलत स्किन केयर के कारण बच्चों में खुजली, लाल चकत्ते, रैशेज़ और कई बार एग्जिमा जैसी समस्याएं दिखाई देती हैं। बच्चों की त्वचा के लिए हॉस्पिटल उपलब्ध है। यदि समय पर सही इलाज न किया जाए, तो त्वचा पर इंफेक्शन का खतरा बढ़ता है।
डॉक्टर बच्चों की त्वचा के लिए विशेष मॉइस्चराइजिंग क्रीम या ऑइंटमेंट की सलाह देते हैं। जो त्वचा की प्राकृतिक नमी को बनाए रखने में मदद करती हैं। यह क्रीम त्वचा की ऊपरी परत को मजबूत करती हैं और रूखापन, खिंचाव व खुजली को कम करती हैं।
यदि बच्चे को अत्यधिक खुजली, बेचैनी या नींद में परेशानी हो रही हो, तो डॉक्टर की सलाह से एंटीहिस्टामिन सिरप दिया जाता है। यह दवा एलर्जी की प्रतिक्रिया को कम करती है और खुजली से राहत दिलाती है।
जब त्वचा पर ज्यादा लालिमा, सूजन या एग्जिमा के लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर कम शक्ति वाली स्टेरॉयड क्रीम सीमित समय के लिए देते हैं। यह सूजन और खुजली को तेजी से नियंत्रित करती है।
अगर त्वचा पर पस, तेज सूजन, बुखार या दर्द हो, तो यह बैक्टीरियल या फंगल इंफेक्शन का संकेत होता है। ऐसे में डॉक्टर जांच के बाद एंटीबायोटिक या एंटीफंगल दवाएं देते हैं।
जब खुजली बहुत ज्यादा हो
चकत्ते फैलने लगें
त्वचा से पानी या पस निकलने लगे
बुखार या सुस्ती साथ में हो
5–7 दिन में सुधार न दिखे
शिशुओं में ड्राय स्किन, क्रैडल कैप, एग्जिमा और डायपर रैश सर्दियों में अधिक देखे जाते हैं। बेस्ट चाइल्ड स्किन स्पेशलिस्ट में उपलब्ध है। शिशुओं की त्वचा पर केवल डॉक्टर द्वारा सुझाए गए बेबी प्रोडक्ट्स ही इस्तेमाल करने चाहिए।
सर्दियों में बच्चों की रूखी त्वचा और चकत्ते आम समस्या हैं। लेकिन सही देखभाल और समय पर इलाज से इन्हें आसानी से नियंत्रित किया जाता है। घरेलू उपायों के साथ-साथ डॉक्टर की सलाह लेना बेहद जरूरी है। खासकर जब समस्या बार-बार हो रही हो। स्वयं दवा न दें और किसी भी क्रीम का लंबे समय तक उपयोग न करें। इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए। ऐसा करने से नुकसान होता है।
प्रश्न 1: क्या सर्दियों की त्वचा एलर्जी संक्रामक होती है?
उत्तर: नहीं, सर्दियों में होने वाली त्वचा एलर्जी संक्रामक नहीं होती। यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलती है।
प्रश्न 2: क्या रोज तेल या मॉइस्चराइजर लगाना जरूरी है?
उत्तर: हां, सर्दियों में रोजाना मॉइस्चराइज़र या तेल लगाना बेहद जरूरी होता है। खासकर नहाने के तुरंत बाद क्रीम या बेबी ऑयल लगाने से त्वचा की नमी बनी रहती है।
प्रश्न 3: क्या विंटर रैश अपने आप ठीक हो जाता है?
उत्तर: हल्के मामलों में विंटर रैश सही देखभाल और नियमित मॉइस्चराइज़र से अपने आप ठीक हो सकता है।
प्रश्न 4: क्या एग्जिमा सर्दियों में बढ़ता है?
उत्तर: हां, सर्दियों में ठंड और त्वचा की अत्यधिक ड्रायनेस के कारण एग्ज़िमा के लक्षण बढ़ जाते हैं। इस दौरान त्वचा ज्यादा खुजलीदार, लाल और मोटी होती है।
प्रश्न 5: बच्चों को कौन-सा साबुन इस्तेमाल कराना चाहिए?
उत्तर: बच्चों के लिए हमेशा खुशबू-रहित, माइल्ड बेबी सोप या सिंडेट बार का उपयोग करना चाहिए। यह त्वचा के पीएच को संतुलित रखता है और एलर्जी या जलन की संभावना कम करता है।