Your Health, Our Priority

Request Call Back

Request an Appointment

CAPTCHA
Solve this simple math problem and enter the result. E.g. for 1+3, enter 4.
* By clicking on the above button you agree to receive updates on WhatsApp

किडनी खराब होने के शुरुआती लक्षण: 15 क्लिनिकल संकेत, जांच और मेडिकल डाइट चार्ट

भारत में क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) एक महामारी का रूप ले चुकी है। इंडियन जर्नल ऑफ नेफ्रोलोजी के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 10% से 14% भारतीय आबादी गुर्दे की किसी न किसी बीमारी से पीड़ित है। दिल्ली-NCR और नोएडा जैसे महानगरीय क्षेत्रों में अनियंत्रित मधुमेह (Diabetes) और उच्च रक्तचाप (Hypertension) इसके प्रमुख कारण हैं।

 

सबसे बड़ी चिकित्सा चुनौती यह है कि किडनी को 'साइलेंट किलर' माना जाता है। किडनी की कार्यप्रणाली जब तक 60% से 70% तक नष्ट नहीं हो जाती, तब तक शरीर में कोई बाहरी लक्षण दिखाई नहीं देते। यदि आप इंटरनेट पर किडनी खराब होने के लक्षण (kidney kharab hone ke lakshan) या किडनी खराब होने के शुरुआती लक्षण (kidney kharab hone ke shuruati lakshan) खोज रहे हैं, तो यह विस्तृत क्लिनिकल गाइड आपके लिए है।

 

किडनी फंक्शन डायग्नोस्टिक मैट्रिक्स (eGFR & Creatinine Chart)

गुर्दे के स्वास्थ्य का सटीक आकलन केवल शारीरिक लक्षणों से नहीं, बल्कि विशिष्ट बायोमार्कर (biomarkers) से किया जाता है। नीचे दी गई तालिका गुर्दे की कार्यप्रणाली के प्रमुख परीक्षणों और उनकी क्लिनिकल व्याख्या को दर्शाती है:

 

टेस्ट का नाम

सामान्य सीमा (Normal Range)

असामान्य स्तर का संकेत

क्लिनिकल महत्व

सीरम क्रिएटिनिन (Serum Creatinine)

पुरुष: 0.7-1.3 mg/dL, महिला: 0.6-1.1 mg/dL

> 1.4 mg/dL

मांसपेशियों के मेटाबॉलिज्म से निकलने वाला वेस्ट, जो किडनी की फिल्टर क्षमता घटने पर रक्त में बढ़ता है।

eGFR (Glomerular Filtration Rate)

90 mL/min/1.73m² या अधिक

< 60 mL/min/1.73m²

यह दर्शाता है कि गुर्दे प्रति मिनट कितने मिलीलीटर रक्त को साफ कर रहे हैं।

यूरिन माइक्रोएल्ब्यूमिन (UACR)

< 30 mg/g

> 30 mg/g

मूत्र में प्रोटीन (एल्ब्यूमिन) का रिसाव, जो ग्लोमेरुलर डैमेज का पहला संकेत है।

सिस्टैटिन सी (Cystatin C)

0.51 - 0.98 mg/L

> 1.0 mg/L

क्रिएटिनिन की तुलना में eGFR का अधिक संवेदनशील और सटीक बायोमार्कर।

 

किडनी खराब होने के शुरुआती लक्षण (Early-Stage CKD Symptoms)

क्रोनिक किडनी डिजीज के शुरुआती चरणों (Stage 1 to 3) में नेफ्रॉन (किडनी की फिल्टरिंग कोशिकाएं) धीरे-धीरे नष्ट होते हैं। इस दौरान शरीर में निम्नलिखित क्लिनिकल संकेत दिखाई देते हैं जो किडनी खराब होने के शुरुआती लक्षण (kidney kharab hone ke shuruati lakshan) के रूप में जाने जाते हैं:

 

1. सुस्ती, लगातार थकान और कमजोरी (Fatigue & Brain Fog)

 

  • क्लिनिकल कारण: स्वस्थ किडनी एरिथ्रोपोटिन (Erythropoietin - EPO) नामक हार्मोन का स्राव करती हैं। यह हार्मोन अस्थि मज्जा (bone marrow) को लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) के निर्माण का संदेश देता है। जब किडनी खराब होने लगती हैं, तो EPO का उत्पादन अत्यधिक कम हो जाता है, जिससे शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की कमी हो जाती है और एनीमिया (Anemia) विकसित होता है। ऑक्सीजन की कमी के कारण मस्तिष्क और मांसपेशियों में लगातार थकान, सुस्ती और भ्रम (brain fog) की स्थिति बनी रहती है।

     

2. आंखों के आसपास और चेहरे पर सूजन (Periorbital Edema)

 

  • क्लिनिकल कारण: जब किडनी के नाजुक फिल्टर्स (glomeruli) डैमेज होते हैं, तो वे रक्त में मौजूद आवश्यक प्रोटीनों को रोक नहीं पाते। इसके परिणामस्वरूप एल्ब्यूमिन प्रोटीन मूत्र के रास्ते बाहर लीक होने लगता है। रक्त में प्रोटीन की कमी (Hypoalbuminemia) होने से रक्त वाहिकाओं का ऑन्कोटिक दबाव (oncotic pressure) असंतुलित हो जाता है। इसके कारण रक्त वाहिकाओं से तरल पदार्थ रिसकर आसपास के कोमल ऊतकों (tissues), विशेष रूप से आंखों के नीचे जमा होने लगता है, जिसे पफी आइज (Puffy eyes) भी कहते हैं।

     

3. पैरों, टखनों और हथेलियों में सूजन आना (Peripheral Edema)

 

  • क्लिनिकल कारण: गुर्दे की विफलता (वृक्कीय विफलता) के दौरान शरीर से सोडियम और पानी का प्राकृतिक उत्सर्जन (excretion) पूरी तरह बाधित हो जाता है। जब शरीर में अतिरिक्त सोडियम का प्रतिधारण (sodium retention) होने लगता है, तो गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से यह अतिरिक्त तरल पदार्थ पैरों, टखनों (ankles) और हाथों के ऊतकों में जमा हो जाता है। इस स्थिति को पेरिफेरल एडिमा कहा जाता है। सूजन वाले हिस्से को उंगली से दबाने पर वहां गड्ढा (Pitting Edema) बन जाता है।
गुर्दे की खराबी के संकेत में पैरों और टखनों में होने वाली एडिमा सूजन

 

4. मूत्र की आवृत्ति और समय में बदलाव (Nocturia / रात में बार-बार पेशाब आना)

 

  • क्लिनिकल कारण: जैसे-जैसे किडनी डैमेज (गुर्दा डैमेज) बढ़ता है, वैसे-वैसे गुर्दे की रीनल ट्यूब्यूल्स की मूत्र को गाढ़ा करने की क्षमता (concentrating ability) समाप्त होने लगती है। इसके परिणामस्वरूप, मूत्र का आयतन बढ़ जाता है और मरीज को रात के समय बार-बार पेशाब जाने की तीव्र इच्छा महसूस होती है (Nocturia)। यह मधुमेह के रोगियों में किडनी डैमेज का पहला मजबूत संकेत है।

बार-बार पेशाब आना गुर्दे की विफलता और किडनी खराब होने के शुरुआती लक्षण

 

5. मूत्र में असामान्य और गाढ़ा झाग बनना (Foamy Urine / Proteinuria)

 

  • क्लिनिकल कारण: सामान्य मूत्र में प्रोटीन नहीं होता है। लेकिन जब किडनी के ग्लोमेरुलर फिल्टर्स बड़े पैमाने पर क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, तो बड़े आकार के प्रोटीन अणु (protein molecules) मूत्र में लीक होने लगते हैं। मूत्र में प्रोटीन (विशेषकर एल्ब्यूमिन) की उच्च मात्रा जब हवा और पानी के संपर्क में आती है, तो शौचालय में साबुन के झाग की तरह गाढ़ा झाग बनता है। यह झाग कई बार फ्लश करने पर भी आसानी से साफ नहीं होता।

पेशाब में गाढ़ा झाग बनना और प्रोटीनुरिया जो किडनी डैमेज को दर्शाता है

 

6. त्वचा में अत्यधिक सूखापन, पपड़ी और खुजली (Uremic Pruritus)

 

  • क्लिनिकल कारण: स्वस्थ किडनी रक्त से यूरिया, यूरिक एसिड और फास्फोरस जैसे अपशिष्ट पदार्थों को फिल्टर करके शरीर में कैल्शियम और फास्फोरस का सही संतुलन बनाए रखती हैं। जब किडनी की फिल्टर क्षमता गिरती है, तो रक्त में फास्फोरस का स्तर अनियंत्रित रूप से बढ़ जाता है (Hyperphosphatemia)। यह अतिरिक्त फास्फोरस त्वचा के नीचे जमा होकर कैल्शियम के साथ मिलकर माइक्रो-क्रिस्टल्स बनाता है, जिससे त्वचा में गंभीर, लगातार और असहनीय खुजली (Uremic Pruritus) होने लगती है।

त्वचा का सूखापन और खुजली जो किडनी फेलियर के लक्षण हैं

 

7. मुंह में लोहे जैसा स्वाद और सांसों की दुर्गंध (Metallic Taste & Uremic Fetor)

 

  • क्लिनिकल कारण: जब रक्त में यूरिया और नाइट्रोजन युक्त अपशिष्ट पदार्थों का संचय (Uremia) होने लगता है, तो लार ग्रंथियों में मौजूद यूरिया बैक्टीरिया द्वारा अमोनिया में तोड़ दिया जाता है। इसके कारण मरीज के मुंह का स्वाद हमेशा धातु या लोहे जैसा (metallic taste) कड़वा बना रहता है। इस स्थिति में सांसों से अमोनिया या यूरिन जैसी तीखी गंध (Uremic fetor) आने लगती है और भोजन के प्रति पूरी तरह अरुचि पैदा हो जाती है।
मुंह का स्वाद बिगड़ना और भूख न लगना जो किडनी डैमेज का संकेत है

 

किडनी डैमेज होने के गंभीर लक्षण (Advanced-Stage Symptoms)

जब किडनी की कार्यक्षमता 70% से अधिक नष्ट हो जाती है (Stage 4 & 5), तो शरीर में जीवन के लिए संकट पैदा करने वाले निम्नलिखित लक्षण दिखाई देते हैं जो किडनी फेलियर के लक्षण (kidney failure symptoms) कहलाते हैं:

 

8. सांस लेने में तकलीफ और फेफड़ों में पानी भरना (Dyspnea & Pulmonary Edema)

 

  • क्लिनिकल कारण: शरीर में सोडियम और पानी का अत्यधिक संचय होने के कारण रक्त का आयतन (blood volume) बढ़ जाता है। जब हृदय इस अतिरिक्त दबाव को पंप नहीं कर पाता, तो यह तरल पदार्थ फेफड़ों की हवा थैलियों (alveoli) में रिसने लगता है। इसे 'पल्मोनरी एडिमा' कहा जाता है, जिसके कारण मरीज को सीधे लेटने पर दम घुटने जैसा महसूस होता है और सांस फूलने लगती है।

सांस लेने में तकलीफ जो फेफड़ों में पानी भरने और किडनी फेलियर को दर्शाती है

 

9. पेशाब में खून आना (Gross Hematuria)

 

  • क्लिनिकल कारण: जब किडनी का फिल्ट्रेशन बैरियर पूरी तरह से टूट जाता है, तो बड़ी लाल रक्त कोशिकाएं (RBCs) मूत्र मार्ग में लीक होने लगती हैं। इसके कारण पेशाब का रंग गुलाबी, लाल या कोला जैसा गहरा भूरा हो जाता है। यह ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस, किडनी इन्फेक्शन या किडनी स्टोन का एक गंभीर संकेत है।
पेशाब में खून आना जो किडनी के नाजुक फिल्टर्स के टूटने का संकेत है

 

10. पीठ और पसलियों के नीचे तेज दर्द (Flank Pain)

 

  • क्लिनिकल कारण: किडनी का दर्द पीठ के ऊपरी या मध्य भाग में, पसलियों के ठीक नीचे (Flank area) महसूस होता है। यह दर्द मस्कुलर पेन से अलग होता है; यह बहुत गहरा, लगातार और असहनीय होता है जो पेट के निचले हिस्से (Groin) की तरफ बढ़ता है। यह मुख्य रूप से किडनी स्टोन, पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज (PKD) या गंभीर रीनल इन्फेक्शन के कारण होता है।
पीठ और पसलियों के नीचे तेज दर्द जो गुर्दे की बीमारी का संकेत है

 

11. लगातार मतली और प्रोजेक्टाइल उल्टी (Uremic Vomiting)

 

  • क्लिनिकल कारण: रक्त में यूरिया, क्रिएटिनिन और यूरिक एसिड जैसे विषाक्त पदार्थों के खतरनाक स्तर तक बढ़ने से मस्तिष्क के कीमोरिसेप्टर ट्रिगर ज़ोन (CTZ) और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट में सूजन आ जाती है। इसके कारण मरीज को कुछ भी खाने या पीने पर तुरंत गंभीर उल्टी और मतली की समस्या होती है।
गंभीर मतली और उल्टी जो रक्त में क्रिएटिनिन बढ़ने के लक्षण हैं

 

12. मांसपेशियों में गंभीर ऐंठन और कंपन (Hypocalcemia & Cramps)

 

  • क्लिनिकल कारण: स्वस्थ किडनी विटामिन डी को उसके सक्रिय रूप (Calcitriol) में परिवर्तित करती हैं। यह सक्रिय रूप छोटी आंत से कैल्शियम के अवशोषण के लिए आवश्यक है। जब किडनी खराब होती हैं, तो सक्रिय विटामिन डी की कमी से रक्त में कैल्शियम का स्तर गिर जाता है (Hypocalcemia) और फास्फोरस बढ़ जाता है, जिससे पैरों और हाथों की मांसपेशियों में असहनीय ऐंठन और झटके आने लगते हैं।
मांसपेशियों में गंभीर ऐंठन जो कैल्शियम और फास्फोरस के असंतुलन को दर्शाती है

 

13. दवाओं से नियंत्रित न होने वाला उच्च रक्तचाप (Refractory Hypertension)

 

  • क्लिनिकल कारण: गुर्दे खराब होने पर वे 'रेनिन' (Renin) नामक हार्मोन का अत्यधिक स्राव करते हैं, जो रक्त वाहिकाओं को संकीर्ण कर देता है। इसके साथ ही शरीर में अतिरिक्त सोडियम और पानी का बढ़ा हुआ दबाव मिलकर रक्तचाप को खतरनाक रूप से बढ़ा देता है। इस स्थिति को रिफ्रेक्ट्री हाइपरटेंशन कहते हैं, जिसे तीन से अधिक एंटी-हाइपरटेंसिव दवाओं से भी नियंत्रित करना मुश्किल होता है।
अनियंत्रित उच्च रक्तचाप जो गुर्दे की विफलता का मुख्य कारण और लक्षण दोनों है

 

14. मानसिक भ्रम, उनींदापन और याददाश्त कमजोर होना (Uremic Encephalopathy)

 

  • क्लिनिकल कारण: जब नाइट्रोजन युक्त अपशिष्ट पदार्थ (uremic toxins) रक्त-मस्तिष्क अवरोध (blood-brain barrier) को पार कर जाते हैं, तो वे केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS) को सीधे प्रभावित करते हैं। इससे रोगी को ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होती है, अत्यधिक नींद आती है, और गंभीर मामलों में दौरे (seizures) पड़ सकते हैं या रोगी बेहोश (coma) हो सकता है।
मानसिक भ्रम और उनींदापन जो यूरिमिक एन्सेफैलोपैथी का संकेत है

 

15. त्वचा पर सफेद परत का जमना (Uremic Frost)

 

  • क्लिनिकल कारण: अंतिम चरण के किडनी फेलियर (Stage 5 CKD) में, जब रक्त में यूरिया का स्तर अत्यधिक बढ़ जाता है, तो शरीर इसे पसीने के माध्यम से त्वचा पर बाहर निकालने का प्रयास करता है। जब पसीना सूख जाता है, तो चेहरे, छाती और बाजुओं पर यूरिया के सफेद रंग के महीन क्रिस्टल जमा हो जाते हैं, जिसे 'उरेमिक फ्रॉस्ट' कहा जाता है।
 उरेमिक फ्रॉस्ट जो अंतिम चरण के किडनी फेलियर का संकेत है

 

नेफ्रोटॉक्सिक ड्रग वार्निंग: किडनी को नष्ट करने वाली दवाएं

कई सामान्य दवाएं सीधे तौर पर किडनी की फिल्टरिंग कोशिकाओं को नष्ट कर सकती हैं। इन दवाओं के अनियंत्रित सेवन से बचें:

  1. गैर-स्टेरायडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (NSAIDs / Painkillers):
    • दवाएं: डाइक्लोफेनाक (Diclofenac), इबुप्रोफेन (Ibuprofen), नेप्रोक्सीन (Naproxen), केटोरोलैक (Ketorolac)।
    • खतरा: ये दवाएं किडनी में रक्त के प्रवाह को नियंत्रित करने वाले 'प्रोस्टाग्लैंडिंस' को ब्लॉक कर देती हैं, जिससे एक्यूट किडनी इंजरी (AKI) हो सकती है।
  2. नेफ्रोटॉक्सिक एंटीबायोटिक्स (Nephrotoxic Antibiotics):
    • दवाएं: एमिकासिन (Amikacin), जेंटामाइसिन (Gentamicin), वैनकोमाइसिन (Vancomycin)।
    • खतरा: ये सीधे किडनी के रीनल ट्यूब्यूल्स को नुकसान पहुंचाती हैं (Acute Tubular Necrosis)।
  3. प्रोटॉन पंप इनहिबिटर (PPIs - एसिडिटी की दवाएं):
    • दवाएं: ओमेप्राजोल (Omeprazole), पैंटोप्राजोल (Pantoprazole)।
    • खतरा: लंबे समय तक बिना डॉक्टर की सलाह के इनका सेवन करने से किडनी में क्रोनिक सूजन (Interstitial Nephritis) हो सकती है।

क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) चरण-दर-चरण एक्शन प्लान

किडनी डैमेज का पता चलने पर घबराने के बजाय चरण के अनुसार चिकित्सकीय कदम उठाना आवश्यक है:

  • स्टेज 1 और 2 (eGFR 60 से अधिक):
    • हर 3 महीने में माइक्रोएल्ब्यूमिन और सीरम क्रिएटिनिन की जांच करें।
    • ब्लड शुगर (HbA1c कम रखें) और ब्लड प्रेशर (130/80 mmHg से कम) को कड़े नियंत्रण में रखें।
  • स्टेज 3 (eGFR 30 - 59):
    • तुरंत एक प्रमाणित नेफ्रोलॉजिस्ट (Nephrologist) से परामर्श लें।
    • नेफ्रोटॉक्सिक दवाओं का सेवन पूरी तरह बंद करें।
    • एनीमिया और हड्डियों के मिनरल असंतुलन की जांच शुरू करें।
  • स्टेज 4 (eGFR 15 - 29):
    • नेफ्रोलॉजिस्ट की देखरेख में वैस्कुलर एक्सेस (AV Fistula) का निर्माण करवाएं (डायलिसिस की तैयारी के लिए)।
    • प्रोटीन, सोडियम और पोटेशियम के कड़े प्रतिबंधों को लागू करें।
  • स्टेज 5 (eGFR 15 से कम):
    • रीनल रिप्लेसमेंट थेरेपी (डायलिसिस या प्री-एम्प्टिव किडनी ट्रांसप्लांट) के विकल्पों पर चर्चा करें।

 

किडनी स्वास्थ्य के लिए मेडिकल डाइट गाइड (Dietary Matrix)

किडनी डैमेज होने पर सामान्य संतुलित आहार को बदलकर एक विशिष्ट प्रतिबंधात्मक आहार योजना (restrictive diet plan) अपनानी होती है। कई बार मरीज प्रोटीन की कमी पूरी करने के लिए अनजाने में अत्यधिक प्रोटीन लेते हैं, जिससे समस्या बढ़ती है। गुर्दे की बीमारी में खान-पान को संतुलित रखने के लिए आप हमारे पूर्व ब्लॉग सत्तू पीने के बेमिसाल फायदे और चिया सीड्स के फायदे पढ़ सकते हैं।

 

पोषक तत्वों का प्रतिबंधात्मक चार्ट (RDA for CKD Patients):

पोषक तत्व (Nutrient)

सामान्य सीमा

स्टेज 3-4 CKD में सीमा

क्यों आवश्यक है?

सोडियम (Sodium)

< 2300 mg/day

< 1500 mg/day

अतिरिक्त सोडियम एडिमा और उच्च रक्तचाप को खतरनाक रूप से बढ़ाता है।

पोटेशियम (Potassium)

No limit

< 2000 mg/day

बढ़ा हुआ पोटेशियम हृदय की धड़कन को अचानक रोक सकता है।

फास्फोरस (Phosphorus)

No limit

< 800 - 1000 mg/day

अतिरिक्त फास्फोरस हड्डियों को कमजोर और धमनियों को कठोर बनाता है।

प्रोटीन (Protein)

1.0g / kg body weight

0.6g - 0.8g / kg body weight

प्रोटीन के चयापचय से यूरिया बनता है, जो कमजोर किडनी पर दबाव डालता है।

 

क्या खाएं और किससे बचें (Kidney Diet Sheet):

 

  • खाएं (Safe Foods): घिया (Bottle Gourd), तोरई (Ridge Gourd), कद्दू (Pumpkin), सेब, पपीता, नाशपाती, और धुली हुई मूंग दाल।
  • परहेज करें (Avoid): केला, संतरा, नारियल पानी, टमाटर, आलू, पालक, साबुत दालें, डेयरी उत्पाद, और प्रसंस्कृत (processed) डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ।

 

किडनी रोगों से जुड़ी भ्रांतियां और क्लिनिकल सच

  • भ्रांति 1: क्या केवल दर्द निवारक दवाएं खाने से ही किडनी फेल होती है?
    • सच: नहीं। मधुमेह और अनियंत्रित उच्च रक्तचाप मिलकर भारत में 75% से अधिक किडनी फेलियर के मामलों के लिए जिम्मेदार हैं। पेनकिलर्स का अत्यधिक सेवन इसे और तेज कर देता है।
  • भ्रांति 2: किडनी खराब होने पर हमेशा पेशाब आना बंद हो जाता है?
    • सच: यह पूरी तरह गलत है। क्रोनिक किडनी डिजीज के स्टेज 1 से स्टेज 4 तक पेशाब की मात्रा पूरी तरह सामान्य रह सकती है। केवल अंतिम चरण (Stage 5) में पेशाब की मात्रा बहुत कम (Anuria) होती है।
  • भ्रांति 3: यदि सीरम क्रिएटिनिन 1.5 mg/dL है, तो घबराने की कोई बात नहीं है?
    • सच: सीरम क्रिएटिनिन का 1.5 mg/dL होना यह दर्शाता है कि आपकी किडनी की कार्यक्षमता पहले ही 50% तक नष्ट हो चुकी है। इस स्तर पर तुरंत नेफ्रोलॉजिस्ट से मिलना अनिवार्य है।
FAQs

प्रश्न 1 : किडनी खराब होने का सबसे पहला लक्षण क्या हो सकता है ?

उत्तर: अक्सर पेशाब में बदलाव (जैसे अधिक या कम पेशाब आना, झाग या खून आना) किडनी खराब होने का सबसे पहला early sign हो सकता है।

प्रश्न 2 : क्या किडनी की बीमारी में थकावट महसूस होना सामान्य है ?

उत्तर: किडनी की कार्यक्षमता कम होने पर शरीर से विषैले पदार्थ नहीं निकलते, जिससे थकान और कमजोरी होना सामान्य symptom है।

प्रश्न 3 : क्या किडनी की बीमारी में शरीर में सूजन आती है ?

उत्तर: जब किडनी ठीक से काम नहीं करती तो शरीर में तरल जमा होने लगता है, जिससे चेहरे, टखनों और पैरों में सूजन आ सकती है। यह एक common warning sign है।

प्रश्न 4 : क्या किडनी की बीमारी का इलाज संभव है ?

उत्तर: शुरुआती अवस्था में यदि सही समय पर treatment किया जाए तो किडनी की कार्यक्षमता को बचाया और नियंत्रित किया जा सकता है।

प्रश्न 5: किन लोगों को किडनी की बीमारी का खतरा ज्यादा होता है ?

उत्तर: डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, पारिवारिक इतिहास या लंबे समय तक पेनकिलर्स लेने वालों को किडनी रोग का खतरा अधिक होता है। इन्हें regular checkup कराना चाहिए।

प्रश्न 6: क्या घर पर किडनी की बीमारी के लक्षणों को पहचाना जा सकता है ?

उत्तर: कुछ लक्षण जैसे पेशाब में बदलाव, थकावट, सूजन आदि घर पर महसूस किए जा सकते हैं, लेकिन सही diagnosis के लिए डॉक्टर द्वारा जांच आवश्यक है।

Written and verified by:
Dr. Navin Jha

Dr. Navin Jha

MBBS, MD,DNB, DrNB | Exp: 11 Yr
Nephrology

Dr. Navin Jha is an experienced Nephrologist with 11+ years of expertise in diagnosing and treating kidney disorders, including chronic kidney disease, acute kidney failure, and dialysis management.